Dehradun News: 23 साल बाद जेनी ने तोड़ी चुप्पी, हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप; दोबारा CBI जांच की मांग
23 साल पुराने मामले में आरोपों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करतीं जेनी।
23 साल पुराने मामले में महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लगाए गंभीर आरोप, DGP को पत्र देकर मुकदमा दर्ज करने और बेटे का दोबारा DNA टेस्ट कराने की उठाई मांग।
देहरादून, 7 नवंबर 2026। उत्तराखंड की सियासत में करीब 23 साल पहले सुर्खियों में आया जेनी प्रकरण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। लंबे समय तक शांत रहे इस मामले में शनिवार को जेनी उर्फ इंदिरा देवी ने देहरादून पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर कई गंभीर आरोप लगाए। महिला ने वर्ष 2003 में नाबालिग होने के दौरान दुष्कर्म किए जाने, गर्भवती होने के बाद मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलने तथा तत्कालीन जांच प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उसने पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने और अपने 23 वर्षीय बेटे का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने करीब 23 साल पुराने घटनाक्रम को याद करते हुए अपनी आपबीती बताई। वह कई बार भावुक भी हुई। उसके आरोपों ने पुराने मामले की जांच, बेटे के पितृत्व और उस समय की परिस्थितियों को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
16 साल की उम्र में देहरादून आने और एसटीडी बूथ पर काम करने का दावा
जेनी ने बताया कि वह अक्तूबर 2002 में देहरादून आई थी। उस समय उसकी उम्र महज 16 साल थी। उसने कहा कि देहरादून में वह एक एसटीडी बूथ पर काम करती थी। इसी दौरान एक कार्यकर्ता ने उसकी मुलाकात तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत से कराई थी। महिला के मुताबिक, इसके बाद वह करीब डेढ़ से दो महीने तक यमुना कॉलोनी में रही।
उसने आरोप लगाया कि इस दौरान उसे कई होटलों में भी ले जाया गया और घर, होटलों तथा विभिन्न पार्टियों में उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया। महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2003 में जब यह घटनाक्रम हुआ, तब उसकी उम्र 16 साल थी और हरक सिंह रावत सत्ता में प्रभावशाली पद पर थे। उसका कहना है कि उस समय उनके राजनीतिक प्रभाव के कारण उसे कहीं से मदद नहीं मिल सकी।
गर्भवती होने के बाद प्रताड़ित करने और पागलखाने में रखने का आरोप
महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि गर्भवती होने के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं। उसके मुताबिक, उसे झूठे आरोप लगाकर पागलखाने में डाल दिया गया था। उसने कहा कि उस समय उसे हिंदी भाषा की जानकारी नहीं थी और वह परिस्थितियों को ठीक से समझ भी नहीं पाती थी।
जेनी का आरोप है कि उसके साथ मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत प्रताड़ना हुई। उसे धमकाकर वहां से बाहर निकाला गया। महिला ने बताया कि जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, उसने कर दिए। उस समय वह यह भी नहीं समझ पा रही थी कि दस्तावेजों में क्या लिखा है और उन पर हस्ताक्षर करने के क्या परिणाम हो सकते हैं।
अपने ही वकील की भूमिका पर उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने उस समय की कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उसने आरोप लगाया कि उसकी ओर से नियुक्त वकील भी दूसरे पक्ष की पैरवी कर रहा था। महिला के अनुसार, उसे जिस वकील ने जहां हस्ताक्षर करने के लिए कहा, उसने कर दिए। भाषा की जानकारी नहीं होने और कानूनी प्रक्रिया की समझ न होने के कारण वह अपने अधिकारों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई।
उसने कहा कि उस समय उसे उचित सहायता नहीं मिली और उसकी बात को गंभीरता से नहीं सुना गया। महिला ने दावा किया कि उसके साथ जो कुछ हुआ, उसमें वह लंबे समय तक अकेले संघर्ष करती रही।
सीबीआई जांच पर सवाल, बेटे का डीएनए सैंपल नहीं लेने का दावा
जेनी ने पुराने मामले की सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए। उसने कहा कि सीबीआई की टीम उससे मिलने पागलखाने में केवल एक बार आई थी। महिला ने डीएनए जांच की प्रक्रिया को लेकर सवाल करते हुए दावा किया कि उसके बेटे का सैंपल ही नहीं लिया गया था। ऐसे में डीएनए टेस्ट किस आधार पर किया गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
महिला ने कहा कि उसका बेटा अब 23 साल का हो चुका है। वह अपने पिता की पहचान जानना चाहता है। उसके मुताबिक, इतने वर्षों बाद भी बेटे को पिता का नाम नहीं मिल पाया है। इसी वजह से वह चाहती है कि मामले की नए सिरे से जांच हो और डीएनए टेस्ट दोबारा कराया जाए, ताकि पितृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
2016 में दिल्ली में भी शिकायत की कोशिश का दावा
महिला ने वर्ष 2016 के घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उसने बताया कि वह उस समय दिल्ली में हरक सिंह रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने गई थी। महिला ने आरोप लगाया कि वहां भी उसके साथ जबरदस्ती की गई। उसने इस घटनाक्रम में अपने तत्कालीन वकील शिव चरण सिंह रावत की भूमिका पर सवाल उठाए और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।
महिला के इन आरोपों के बाद वर्ष 2016 में की गई शिकायत की कोशिश और उस समय की परिस्थितियों को लेकर भी नए सवाल खड़े हो रहे हैं।
DGP को पत्र लिखकर मुकदमा दर्ज करने और दोबारा जांच की मांग
जेनी उर्फ इंदिरा देवी ने उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। पत्र में उसने आरोप लगाया है कि वर्ष 2003 में जब वह महज 16 साल की थी, तब उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। उसने पूरे मामले की सीबीआई से दोबारा जांच कराने की मांग भी उठाई है।
महिला ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से सार्वजनिक रूप से उसका नाम लिए जाने के बाद उसे सामने आकर अपनी बात रखने का साहस मिला। उसने बताया कि इससे पहले जब वह अपनी शिकायत लेकर पहुंची थी तो पुलिस की ओर से उसे दोबारा नहीं आने की बात कहकर लौटा दिया गया था। महिला ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण के बाद उत्तराखंड की राजनीति में जब फिर से जेनी प्रकरण का जिक्र होने लगा तो उसने देहरादून आकर अपनी बात रखने का फैसला किया।
उसने यह भी स्पष्ट किया कि वह महेंद्र भट्ट को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती है।
23 साल पुराने मामले में फिर उठे जांच और पितृत्व के सवाल
करीब 23 साल बाद सामने आई जेनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पुराने प्रकरण को फिर चर्चा में ला दिया है। महिला की मांग है कि उसके द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, पुराने जांच रिकॉर्ड की समीक्षा हो और डीएनए परीक्षण के माध्यम से बेटे के पितृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट की जाए।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले में पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना महत्वपूर्ण होगा। अब देखना होगा कि डीजीपी को दिए गए पत्र पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है और इतने वर्षों पुराने मामले की दोबारा जांच की मांग पर शासन और जांच एजेंसियों का क्या रुख रहता है।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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