उत्तराखंड: न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी, लाखों श्रमिकों को धामी सरकार से राहत
प्रतीकात्मक तस्वीर
धामी सरकार का बड़ा फैसला, 20 साल बाद इंजीनियरिंग इकाइयों में वेतन पुनरीक्षण
वीडीए 518 रुपये बढ़ा, 3 लाख से ज्यादा श्रमिकों को मिलेगा सीधा लाभ
देहरादून, 30 अप्रैल 2026: उत्तराखंड में Uttarakhand minimum wage hike के तहत धामी सरकार ने लाखों श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। उद्योगों और इंजीनियरिंग इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों का न्यूनतम वेतन करीब 20 साल बाद पुनरीक्षित किया गया है, जिससे तीन लाख से अधिक श्रमिकों को सीधा फायदा मिलेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुमोदन के बाद 50 या उससे अधिक श्रमिकों वाली इंजीनियरिंग इकाइयों और उद्योगों के लिए नई न्यूनतम मजदूरी दरें तय कर दी गई हैं। ये नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इंजीनियरिंग इकाइयों में वेतन पुनरीक्षण पिछले लगभग 20 वर्षों से लंबित था, जिसे अब लागू कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अकुशल श्रमिकों का मासिक वेतन 13,800 रुपये, अर्धकुशल का 15,000 रुपये और कुशल श्रमिकों का 16,900 रुपये निर्धारित किया गया है। लंबे समय से वेतन संशोधन लंबित होने और बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे श्रमिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, खासकर ऊधमसिंह नगर के सिडकुल क्षेत्र में इस फैसले का व्यापक असर पड़ेगा, जहां कंपनियों में करीब तीन लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। वेतन वृद्धि से बड़ी संख्या में श्रमिक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है।
निजी संस्थानों के श्रमिकों को भी फायदा
निजी व अनुसूचित संस्थानों के श्रमिकों के लिए भी सरकार ने परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) बढ़ाकर 518 रुपये प्रति माह कर दिया है। यह दरें भी 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी। इस फैसले से दुकानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, होटल-रेस्टोरेंट, पेट्रोल पंप, ईंट-भट्टों और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
श्रमायुक्त प्रकाश चंद्र दुमका ने बताया कि मई माह के वेतन में ही श्रमिकों को बढ़ी हुई दरों का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
श्रमिक संगठनों ने किया स्वागत
श्रमिक संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे श्रमिक हित में बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया है। संगठनों का कहना है कि सरकार ने श्रमिकों की लंबे समय से लंबित मांगों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित समाधान दिया है, जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी।
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