उत्तराखंड: बोरवेल हादसे में बुझ गई एक जिंदगी, 10 घंटे चला रेस्क्यू—मनोहर नहीं बच सका, हर आंख हुई नम
27 फुट गहरे गड्ढे में दबे मनोहर को निकालने के लिए SDRF–NDRF की टीमों ने घंटों तक संघर्ष किया, लेकिन हर कोशिश के बाद भी नहीं बच सकी एक जिंदगी
हरिद्वार। श्यामपुर थाना क्षेत्र के कांगड़ी गांव में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। 55 वर्षीय ठेकेदार मनोहर सिंह की बोरवेल के गहरे गड्ढे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। करीब 10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन भी उनकी जिंदगी नहीं बचा सका।
सुबह करीब 10:40 बजे मनोहर सिंह निर्माणाधीन मकान में हैंडपंप के लिए बोरिंग का काम कर रहे थे। करीब 27 फुट गहराई तक खुदाई के बाद वह गड्ढे में नीचे उतरे थे। बताया जा रहा है कि वह नोजल ठीक कर रहे थे, तभी अचानक ऊपर से मिट्टी की भारी ढांग भरभराकर गिर पड़ी। साथ काम कर रहे श्रमिक अमित कुछ समझ पाते, उससे पहले ही मनोहर मिट्टी के नीचे दब चुके थे।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। उपनिरीक्षक आशीष त्यागी के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। बार-बार ढहती मिट्टी राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रही थी।
टीम ने जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से समानांतर गड्ढा खोदकर बचाव कार्य तेज किया। हर पल उम्मीद थी कि मनोहर को जिंदा बाहर निकाल लिया जाएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब 8:45 बजे उन्हें बाहर निकाला गया और जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मनोहर सिंह अपने क्षेत्र में एक अनुभवी हैंडपंप मैकेनिक के रूप में जाने जाते थे। लगभग 30 वर्षों का अनुभव रखने वाले मनोहर ने कई कठिन परिस्थितियों में काम किया था। गांव के लोग बताते हैं कि वह मेहनती होने के साथ-साथ बेहद मिलनसार भी थे।
घटना के बाद कांगड़ी गांव में मातम पसरा हुआ है। मौके पर जुटी भीड़ की आंखें नम थीं और हर कोई मनोहर को याद कर भावुक नजर आया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
श्यामपुर थाना प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। वहीं एसडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन संयुक्त टीम ने पूरी कोशिश की।
एक अनुभवी कारीगर, एक जिम्मेदार इंसान—मनोहर सिंह अब सिर्फ यादों में रह गए हैं, लेकिन उनका जाना गांव के लिए एक गहरा खालीपन छोड़ गया है।
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