उत्तराखंड- पहाड़ के इस सीमांत गांव में महिलाओं ने पेश की आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल
- संगठित होकर स्वरोजगार से जुड़ आत्मनिर्भर बनीं महिलाएं
पिथौरागढ़। धारचूला ब्लाक के ग्राम पंचायत धारचूला देहात के हाट गांव की महिलाओं ने एलईडी बल्ब बनाकर स्वरोजगार के क्षेत्र में कमाल कर दिखाया है। महिलाओं की मेहनत ने धारचूला को नयी पहचान दी है। जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया ने हाट गांव पहुंचकर इस कार्य में लगी महिलाओं का हौसला बढ़ाया। कहा कि वह बाजार की दिक्कत को जिलाधिकारी से बात करके दूर करेंगे।
खेत, खलिहानों में अपना भविष्य देखने वाली हाट गांव की महिलाओं ने कुछ नया करने के लिए सोचा। फिर कदमताल करने लगी। आज सफलता ने इन उद्यमी महिलाओं के कदम चूमना शुरू कर दिया है।
सबसे पहले हाट गांव की महिलाओं ने गांव के भीतर महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इस गांव के सात समूह ने आपस में मिलकर सरस्वती ग्राम संगठन का गठन किया। खेती-बाड़ी कथा पशुपालन से जुड़ी महिलाओं ने एक नई सोच पैदा करते हुए एलइडी बल्व बनाने के लिए प्रशिक्षण लिया। उसके पश्चात नोएडा से कच्चा माल मंगाकर अपने गांव में एलईडी बल्ब बनाने लगी। इन महिलाओं ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह इस टेक्निकल कार्य को पूर्ण कर पाऐंगी।
इनके हौसले तथा जब्बे इन्हें इनके कदमों को रुकने नहीं दिया। आज हाट गांव इन महिलाओं के इस लक्ष्य के बाद एक नए स्वरूप में समाज के सामने आया है। हाट गांव की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं पंचायत घर हाथ में रोज 2 घंटे जमा होकर एलईडी बल्ब बना रही है। बाजार में बेचने के लिए भी महिलाएं खुद निकलकर मार्केटिंग का काम भी अच्छी तरह से कर रही है। इतना ही नहीं इन महिलाओं ने एलईडी बर्फ के अलावा एलईडी की चार्जिंग बल्ब का भी निर्माण कर दिखाया है। एलईडी के बल्ब खराब होने की दशा में उनकी भी महिलाएं मरमत कर उपयोग के लायक बना देती है।
धारचूला के लिए अच्छी खबर है कि अब यहां के लोगों को एलईडी बल्ब चार्जिंग बल्ब तथा एलईडी को ठीक करने के लिए बाहर नहीं जाना होगा। एलईडी बल्ब का निर्माण करना तकनीकी रूप से बहुत कठिन कार्य है। जिसको यहां के साधारण महिलाओं ने कर दिखा कर महिला स्वरोजगार के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया है। महिला स्वयं सहायता समूह की ग्राम संगठन अध्यक्ष द्रोपति धामी का कहना है कि 5, 9 तथा 12 वाट के बल्ब का निर्माण किया गया है।
बाजार भाव से कम दामों में इनको बेचा जा रहा है। अन्य कंपनियों की तरह 6 माह की गारंटी भी उनके द्वारा दी जा रही है।
इतना ही नहीं महिलाओं ने दीपावली में उपयोग किए जाने वाली बिजली की मालाओं का निर्माण भी किया। आज हाट का गांव इस नए रोजगार के नए अवसरों को खोज ही नहीं रहा है, बल्कि धरातल में जा चुका है।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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