Covid-19- चौथी लहर की आंशका के बीच वैज्ञानिकों का दावा ,पढ़िए बच्चों में वायरस का कितना खतरा
नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में कोरोना की चौथी लहर आने के संकेत मिल रहे हैं। भारत की राजधानी दिल्ली, एनसीआर, नोएडा, गाजियाबाद, गुड़गांव आदि शहरों में बड़ी संख्या में बच्चे कोरोना संक्रमित हो गए हैं।
बीते हफ्ते में एक्टिव मामलों में भी करीब 5 फीसदी उछाल आया है। पिछले दो महीने में देखे गए ट्रेंड से यह उलट है। तब नए मामलों और एक्टिव इंफेक्शंस में कमी देखने को मिली थी। सबसे ज्यादा नए मामले तीन राज्यों-दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में आ रहे हैं। यूपी और हरियाणा में ज्यादातर नए मामले गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद और गुरुग्राम में आ रहे हैं। ये सभी जिले दिल्ली से सटे हैं। चिंता की बात यह है कि इस बार बच्चों में भी इंफेक्शन दिख रहा है।
ऐसे में बिहार, झारखंड समेत दूसरे राज्यों में भी अभिभावक अपने बच्चे को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाने में जुट गए हैं।
इधर दिल्ली में बीते 24 घंटे में बेतहाशा बढ़ रहे कोरोना पाॅजिटिव केस के बाद कहा जा रहा है कि देश में कोविड की चौथी लहर आ गई है। यहां होम आइसोलेशन के मामलों में लगभग 48% की वृद्धि एक दिन में दर्ज की गई है। इस बीच केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि बेहद चिंताजनक रूप से दिल्ली में पिछले कुछ दिनों में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामले बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश की राजधानी में सकारात्मकता दर 4 अप्रैल से एक प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है जब यह 1.34 प्रतिशत थी। दिल्ली में कोविड की चौथी लहर आने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आम तौर पर लोगों को डर है कि राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना के मामले बढ़ते ही दूसरे राज्यों में कोरोना संक्रमण में तेजी आ जाएगी।
आइआइटी कानपुर के विशेषज्ञों ने पहले ही देश में मई अंत तक, कोरोना की चौथी लहर आने का अनुमान जताया है। यह अगस्त तक पीक पर आ सकती है। हालांकि, इस बार राहत की बात यह है कि दूसरी और तीसरी लहर की तरह अबकी बार कोरोना वायरस का वैरिएंट ज्यादा डरावना घटनाक्रम लेकर नहीं आया है। XE और BA.2 वैरिएंट की पुष्टि होने के बाद यह कहा गया है कि वायरस का यह प्रारूप ज्यादा संक्रामक है। यह 10 से 70 गुणा अधिक तेजी से फैलता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देशभर में शनिवार को होम आइसोलेशन के मामलों की संख्या 1000 को पार कर गई है। 2.39 प्रतिशत की सकारात्मकता दर के साथ 325 नए कोरोनोवायरस मामले दर्ज किए गए थे। चिंताजनक रूप से, पिछले कुछ दिनों में दैनिक COVID मामले बढ़ रहे हैं, जबकि सकारात्मकता दर 4 अप्रैल से एक प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है, जब यह 1.34 प्रतिशत थी।
पिछले एक सप्ताह में कोरोना के बढ़ते मामले पर नजर रख रहे वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट ने बताया है कि कोरोनो वायरस स्थिति से निपटने के लिए अभी बहुत डरावना स्थिति नहीं है। दैनिक मामलों में उछाल के लिए कोरोना सुरक्षा एहतियात हटाए जाने को जिम्मेवार बताया गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि मास्क हटाने के प्रति पहले ही सरकारों को आगाह किया गया था। कोविड से सुरक्षा संबंधी सभी पर्याप्त उपाय किए जा रहे हैं।
- आईआईटी प्रोफेसर का दावा: फिलहाल चौथी लहर की आशंका नहीं
नई दिल्ली। इस बीच लोगों के मन कोविड-19 संक्रमण की चौथी लहर को लेकर आशंका घर करने लगी है. हालांकि आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर ने इस बीच एक राहत भरी खबर दी है. उन्होंने दावा किया कि फिलहाल भारत में कोरोना संक्रमण की चौथी लहर की संभावना नहीं. उन्होंने अपने गणितीय सूत्र के अनुसार दावा किया कि वायरस के पुराने म्यूटेंट ही अपना असर दिखा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश में 90 फीसदी से अधिक आबादी में प्राकृतिक इम्युनिटी पैदा हो चुकी है, जिसे अब तक वायरस बाईपास करने में सक्षम नहीं हुआ है.
- वैज्ञानिकों का दावा: कोविड का ओमिक्रॉन वैरिएंट बच्चों के लिए खतरनाक, हार्ट अटैक का खतरा
दिल्ली। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अन्य कोरोना वैरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन बच्चों के लिए अधिक खतरनाक है। बच्चों में ओमिक्रॉन के कारण दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक होता है। इसका कारण ओमिक्रॉन से उनके ऊपरी वायुमार्ग में होने वाला संक्रमण (यूएआई) है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो में हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 19 साल की उम्र तक के अस्पताल में भर्ती 18,849 कोरोना मरीजों पर बीमारी के असर का आकलन किया।
अमेरिका की नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी और स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी के शोधार्थी भी इस अध्ययन में शामिल हुए। अध्ययन में पाया गया कि छोटी उम्र के बच्चों में ओमिक्रॉन के कारण यूएआई का खतरा अधिक होता है। इसमें भी ओमिक्रॉन के पूरी तरह हावी होने से पहले औसत 4 साल 5 महीने के बच्चों को खतरा अधिक था, वहीं ओमिक्रॉन की सक्रिय लहर के दौरान दो साल तक के बच्चों पर भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
हालांकि गंभीर क्रॉनिक स्थिति की बात करें तो लहर से पहले और उसके दौरान भर्ती हुए बच्चों की संख्या में बहुत अंतर नहीं था। करीब 21.1 फीसदी बच्चों में ही कोरोना और यूएई दोनों की स्थिति गंभीर हुई थी। जिसमें सांस लेने के लिए उनके नली डालनी पड़ी। बार बार स्थिति बिगड़ने पर इन बच्चों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। यह शोध पिछले हफ्ते जामा पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ।
जीनोम सीक्वेंसिंग नेटवर्क इन्साकॉग के अनुसार, कई सवाल उठने के बाद भी कोरोना रोधी टीका देश में करोड़ों जिंदगियों को बचाने में कामयाब रहा है। नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद स्कारिया का कहना है कि ओमिक्रॉन की तरह इस बार भी देश में महामारी का असर काफी नियंत्रित स्थिति में है, जो सीधे तौर पर कोरोना टीकाकरण की वजह से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर महामारी की लहर आती रहेंगी लेकिन कोरोना रोधी टीका के जरिये संक्रमण का प्रभाव हल्का रखा जा सकता है।
- देश में पिछले 24 घंटे में 1247 नये मामले , एक मरीज की गई जान
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान देश में 1,247 मामले सामने आए, जबकि इससे पहले 18 अप्रैल को 2,183 नए मामले सामने आए थे, जबकि 17 अप्रैल को 1,150 नए मामले सामने आए थे।
आंकड़ों को देखें तो देश में अब सक्रिय मामलों की दर 0.03 प्रतिशत है, जबकि रिकवरी दर 98.8 फीसदी पर पहुंच चुकी है।
पिछले 24 घंटे में 1 की जान गई है जबकि 928 लोग इस बीमारी से ठीक हुए। वहीं यदि दैनिक सक्रिय मामलों की दर की बात की जाए तो वो 0.83 फीसदी रही। गौरतलब है कि अब तक 83.2 करोड़ जांच की जा चुकी हैं, बीते 24 घंटों में 2,61,440 जांच की गई।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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