Uttarakhand High Court: नैनीताल से गौलापार शिफ्टिंग का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट भवन की फाइल फोटो, गौलापार शिफ्टिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को किया रद्द, गौलापार में प्रस्तावित नए परिसर के लिए 26 हेक्टेयर भूमि छह सप्ताह में हस्तांतरित करने के निर्देश
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी के गौलापार स्थानांतरित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए शिफ्टिंग की प्रक्रिया को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के 4 मई 2024 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें स्थानांतरण के मुद्दे पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की बात कही गई थी। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का नया परिसर हल्द्वानी के गौलापार में विकसित किए जाने की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाई जाए।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायालय का कार्य जनमत संग्रह कराने का आदेश देना नहीं है। इस प्रकार के निर्णय न्यायिक अधिकार क्षेत्र के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया के दायरे में आते हैं। इसलिए हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि गौलापार में प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर के लिए चिन्हित 26 हेक्टेयर भूमि से संबंधित सभी प्रशासनिक एवं कानूनी औपचारिकताएं छह सप्ताह के भीतर पूरी कर भूमि हस्तांतरित की जाए। अदालत ने कहा कि नए परिसर के निर्माण में अब अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए और राज्य सरकार समयबद्ध तरीके से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट और उत्तराखंड सरकार आपसी समन्वय के साथ नए परिसर से जुड़े सभी आधारभूत ढांचे, सुविधाओं और अन्य प्रशासनिक पहलुओं का समाधान निकालें, ताकि आधुनिक न्यायिक परिसर के निर्माण का कार्य शीघ्र शुरू किया जा सके।
गौरतलब है कि नैनीताल से हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। नैनीताल की भौगोलिक परिस्थितियां, सीमित भूमि, ट्रैफिक और पार्किंग की समस्याओं को देखते हुए गौलापार में आधुनिक न्यायिक परिसर विकसित करने की योजना बनाई गई थी। वहीं गौलापार में पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की संभावना भी अधिक मानी जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में देहरादून बार एसोसिएशन की याचिका को भी खारिज कर दिया। साथ ही हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की विशेष याचिका पर भी अपना निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट के स्थानांतरण से जुड़े सभी शेष मुद्दों का समाधान अब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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