Pauri News: गुलदार का हमला, 7 साल की बच्ची की मौत से कोहराम; मां ने मौत के जबड़े से बेटी को बचाया
गुलदार के आतंक से आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जताया विरोध।
एक ही दिन जिले में दो दर्दनाक घटनाओं से दहशत, ओजली में मासूम की मौत से पसरा मातम तो सनेह में मां के अदम्य साहस ने बचाई आठ वर्षीय बच्ची की जान; वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश
पौड़ी गढ़वाल, 3 नवंबर 2026। जिले में गुलदार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। जंगलों से निकलकर आबादी के बीच पहुंच रहे गुलदार अब मासूम बच्चों के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। मंगलवार को जिले के दो अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आई घटनाओं ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। पौड़ी के निकट ओजली गांव में गुलदार ने सात वर्षीय मासूम आरुषि को अपना निवाला बना लिया, जबकि कोटद्वार के सनेह क्षेत्र में गुलदार आठ वर्षीय सान्वी को घर के आंगन से उठाकर ले जाने लगा। हालांकि, बच्ची की मां ने अपनी जान की परवाह किए बिना गुलदार का पीछा किया और उसके जबड़े से बेटी को सुरक्षित छुड़ा लिया। एक घटना में परिवार की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं तो दूसरी में मां के अदम्य साहस ने एक मासूम को नया जीवन दे दिया। दोनों घटनाओं के बाद जिले में गुलदार के आतंक और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है।
ओजली में घर लौट रही मासूम को गुलदार ने बनाया निवाला, झाड़ियों में मिला शव
पौड़ी जिला मुख्यालय से सटे ओजली गांव में मंगलवार शाम उस समय चीख-पुकार मच गई, जब सात वर्षीय आरुषि पर गुलदार ने हमला कर दिया। जानकारी के मुताबिक, बच्ची शाम के समय खांड्यूसैंण से घर लौट रही थी। इसी दौरान घात लगाए बैठे गुलदार ने उस पर झपट्टा मारा और उसे घसीटते हुए ले गया। घटना के बाद गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने बच्ची की तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद घर से करीब 100 मीटर दूर झाड़ियों में आरुषि का शव बरामद हुआ।
बताया जा रहा है कि गुलदार बच्ची को गांव के बीच स्थित घर के आंगन से उठा ले गया था। जिस घर के आंगन में कुछ देर पहले तक मासूम की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां देखते ही देखते चीख-पुकार और मातम पसर गया। इस हृदयविदारक घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई।
विधायक का घेराव, ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ जताया आक्रोश
मासूम की मौत के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी का आक्रोशित ग्रामीणों ने घेराव कर विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना था कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की आवाजाही बनी हुई है। आए दिन गुलदार कभी बच्चों तो कभी अन्य लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिससे लोगों का अपने ही गांव में रहना मुश्किल हो गया है।
महिलाओं परमेश्वरी रावत और सुषमा सजवाण समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आए दिन गुलदार दिखाई देते हैं। कई बार घरों के आसपास एक साथ दो-दो गुलदार नजर आते हैं। महिलाओं के मुताबिक, घटना वाले दिन भी गांव में दो गुलदार दिखाई दिए थे। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई कर क्षेत्र को गुलदार के आतंक से निजात दिलाने की मांग की।
सनेह में मां ने दिखाई बहादुरी, गुलदार के जबड़े से बेटी को खींच निकाला
उधर, कोटद्वार के सनेह क्षेत्र में मंगलवार देर शाम एक दूसरी घटना ने लोगों को दहला दिया। यहां घर के आंगन में मौजूद आठ वर्षीय सान्वी पर घात लगाए बैठे गुलदार ने हमला कर दिया। जानकारी के अनुसार, सनेह निवासी संतोष रावत की बेटी सान्वी शाम करीब साढ़े छह बजे अपनी मां नीलम रावत के साथ घर के आंगन की लाइट जलाने पहुंची थी। इसी दौरान आंगन के कोने में छिपे गुलदार ने बच्ची पर झपट्टा मार दिया और उसे जबड़े में दबोचकर खेत की ओर भागने लगा।
बेटी को गुलदार के जबड़े में देखकर मां नीलम ने एक पल भी अपनी जान की परवाह नहीं की। वह शोर मचाते हुए गुलदार के पीछे दौड़ पड़ीं। करीब 100 मीटर दूर जाकर गुलदार रुका तो नीलम ने साहस दिखाते हुए अपनी बेटी को उसके जबड़े से खींच लिया। इस दौरान आसपास के ग्रामीण और परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए। मां के इस अदम्य साहस और सूझबूझ से बच्ची की जान बच गई।
गुलदार के हमले में घायल सान्वी को वन विभाग की टीम ने राजकीय चिकित्सालय पहुंचाया, जहां से उसे बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों के अनुसार, बच्ची की गर्दन पर गुलदार के पंजों के गहरे घाव हैं। घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना है कि गुलदार क्षेत्र में चार लोगों को घायल कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद विभाग समस्या का प्रभावी समाधान नहीं कर पा रहा है। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने अस्पताल पहुंचकर घायल बच्ची का हालचाल जाना।
पौड़ी गढ़वाल जिले में एक ही दिन सामने आई इन दो घटनाओं ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को फिर उजागर कर दिया है। एक ओर ओजली में एक परिवार अपनी मासूम बेटी को खोने के गम में डूबा है तो दूसरी ओर सनेह में मां की बहादुरी से एक बच्ची की जिंदगी बच सकी। इन घटनाओं ने ग्रामीणों के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक लोग अपने घरों के आंगन और गांव की पगडंडियों पर गुलदार के खौफ के साये में जीने को मजबूर रहेंगे। ग्रामीण अब वन विभाग से ठोस और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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