Pauri Garhwal News: गुलदार के हमले में महिला की मौत, 15 दिन में पकड़ने के निर्देश
पौड़ी गढ़वाल के जंगल में गुलदार, हमले में महिला की मौत के बाद क्षेत्र में दहशत।
पौड़ी-श्रीनगर राजमार्ग जाम कर ग्रामीणों ने जताया आक्रोश, गुलदार को पकड़ने और मुआवजे की मांग; वन विभाग ने कैमरा ट्रैप, ड्रोन निगरानी और गश्त बढ़ाने के दिए निर्देश
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर के पास खंडाह क्षेत्र में गुलदार के हमले में घास लेने जंगल गई एक महिला की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के आक्रोश और जनसुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उत्तराखंड लीना ग्रेवाल ने गुलदार को पिंजरे में पकड़ने और आवश्यकता पड़ने पर ट्रैंकुलाइज करने की अनुमति दी है। निर्धारित अवधि में सभी प्रयास विफल रहने और गुलदार के जनसुरक्षा के लिए खतरा बने रहने की स्थिति में अंतिम विकल्प के रूप में उसे मारने की अनुमति भी दी गई है। यह आदेश जारी होने की तिथि से 15 दिनों तक प्रभावी रहेगा।
घास काटते समय महिला पर झपटा गुलदार
वन विभाग के आदेश के अनुसार, 9 अक्टूबर को शाम करीब साढ़े पांच बजे खिर्सू विकासखंड के बछेली ग्रामसभा के तरुली क्षेत्र में बीना देवी (50), पत्नी स्वर्गीय बालमुकुंद, घास काट रही थीं। इसी दौरान गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। हमले में महिला की मौत हो गई। घटना के समय गांव की मधु देवी भी उनके साथ मौजूद थीं।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, गुलदार महिला को घसीटते हुए झाड़ियों की ओर ले जाने लगा, तब साथ मौजूद महिलाओं की नजर उस पर पड़ी। महिलाओं ने शोर मचाना शुरू किया, जिसके बाद गुलदार महिला को छोड़कर झाड़ियों की ओर भाग गया। हालांकि, तब तक बीना देवी की मौत हो चुकी थी। ग्रामीणों ने भी गुलदार को घटनास्थल से भागते हुए देखा।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान महिला की गर्दन पर घाव के निशान पाए गए, जबकि शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट नहीं मिली। वन विभाग के अनुसार, घटनास्थल और आसपास के गांवों में गुलदार की गतिविधियां देखी गई हैं। इससे स्थानीय लोगों में भय बना हुआ है और दोबारा हमले की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने पौड़ी-श्रीनगर राजमार्ग किया जाम
महिला की मौत से आक्रोशित ग्रामीणों ने शनिवार को गुलदार को पकड़ने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग को लेकर पौड़ी-श्रीनगर राजमार्ग जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार की गतिविधियों के कारण लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। जंगल में घास और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए जाने वाले ग्रामीणों को हमले का खतरा सता रहा है।
ग्रामीणों की मांग के बाद वन विभाग ने गुलदार को पकड़ने के लिए कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग की ओर से निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, गश्ती दल तैनात करने और गुलदार की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा और ट्रैंकुलाइज करने की तैयारी
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक लीना ग्रेवाल की ओर से जारी अनुमति के तहत संबंधित गुलदार को पहले पिंजरे में पकड़ने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उसे ट्रैंकुलाइज यानी बेहोश कर पकड़ने की कार्रवाई की जा सकेगी। यदि निर्धारित प्रयासों के बावजूद गुलदार पकड़ में नहीं आता और जनसुरक्षा के लिए खतरा बना रहता है, तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे मारने की अनुमति दी गई है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कार्रवाई से पहले संबंधित गुलदार की पहचान सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि कार्रवाई उसी गुलदार के विरुद्ध की जाए जो महिला पर हुए हमले से संबंधित है। वन विभाग को सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी करने और कार्रवाई की जानकारी तत्काल मुख्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कैमरा ट्रैप और ड्रोन से होगी निगरानी
गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए प्रभावित क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में कैमरा ट्रैप लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पीआईपीओ के माध्यम से निगरानी और ड्रोन की मदद से क्षेत्र की निगरानी करने को कहा गया है। वन विभाग की गश्ती टीम भी तैनात की जाएगी, ताकि गुलदार की गतिविधियों का पता लगाया जा सके और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
वन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि गुलदार को पकड़ने के सभी प्रयास प्राथमिकता से किए जाएं। पिंजरे और ट्रैंकुलाइज करने की प्रक्रिया सफल नहीं होने पर ही निर्धारित शर्तों के तहत अंतिम विकल्प अपनाया जा सकेगा। अनुमति जारी होने की तिथि से 15 दिनों तक प्रभावी रहेगी।
ग्रामीणों में दहशत, सुरक्षा पर टिकी निगाहें
श्रीनगर के निकट ग्रामीण क्षेत्र में महिला की मौत के बाद लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों की मांग है कि गुलदार को जल्द पकड़ा जाए और प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। अब वन विभाग के सामने गुलदार की पहचान सुनिश्चित करने, उसकी गतिविधियों पर नजर रखने और उसे पकड़ने की चुनौती है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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