सपनों की उड़ान भरने घर से निकली थी बेटी, बीच रास्ते में थम गया सफर; डायरी की एक लाइन ने बढ़ाई गुत्थी
NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। (प्रतीकात्मक फोटो)
मध्य प्रदेश से NEET की तैयारी के लिए हल्द्वानी आई 19 वर्षीय छात्रा पीजी के कमरे में मृत मिली, डायरी में लिखे रहस्यमयी शब्दों के बाद कई एंगल पर जांच।
हल्द्वानी। डॉक्टर बनने का सपना लेकर मध्य प्रदेश से उत्तराखंड पहुंची एक 19 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार ने जिस बेटी को उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद के साथ 500 किलोमीटर से अधिक दूर हल्द्वानी भेजा था, उसकी जिंदगी एक बंद कमरे में फंदे पर झूलती मिली। घटना के बाद जहां परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, वहीं कमरे से मिली एक डायरी में लिखे रहस्यमयी शब्दों ने पुलिस जांच को नई दिशा दे दी है।
डॉक्टर बनने का सपना लेकर आई थी हल्द्वानी
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के मानीपुरा कोलारस निवासी अंजलि जाटव (19) पुत्री रघुवीर जाटव ने 30 मई को हल्द्वानी के एक निजी कोचिंग संस्थान में नीट की तैयारी के लिए प्रवेश लिया था। वह फिलहाल डेमो क्लास ले रही थी और 29 जून से उसकी नियमित कक्षाएं शुरू होने वाली थीं। अंजलि मुखानी क्षेत्र में खाटू श्याम मंदिर के पास स्थित एक पीजी में रह रही थी।
परिजनों को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। उसका बड़ा भाई भी हल्द्वानी में रहकर नीट की तैयारी कर चुका था और वर्तमान में एम्स भोपाल में अध्ययनरत है। बेटे की सफलता से प्रेरित होकर परिवार ने बेटी को भी डॉक्टर बनाने का सपना संजोया था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सपना इतनी दर्दनाक तरह से टूट जाएगा।
देर रात आया फोन और खुल गया दर्दनाक राज
मंगलवार देर रात एक युवक ने अंजलि की सहेली को फोन कर बताया कि वह लगातार कॉल करने के बावजूद उसका फोन नहीं उठा रही है। यह सूचना मिलते ही सहेली ने पुलिस और परिजनों को जानकारी दी। जब कमरे की जांच की गई तो दरवाजा बंद मिला।
पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से कमरे की खिड़की की जाली काटी गई। अंदर का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए। अंजलि दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकी हुई मिली। उसे तुरंत नीचे उतारकर सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
डायरी में लिखी एक लाइन ने बढ़ाया रहस्य
घटना स्थल से पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन कमरे से बरामद एक डायरी में लिखी एक पंक्ति ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया है।
“एक को छोड़ दिया है, दूसरे को नहीं छोड़ूंगी।“
यह लाइन आखिर किसके लिए लिखी गई थी और इसके पीछे क्या कारण था, फिलहाल यह जांच का विषय बना हुआ है। पुलिस इस संदेश को आत्महत्या के कारणों से जोड़कर देख रही है और प्रेम प्रसंग समेत अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
मोबाइल और सोशल मीडिया खंगाल रही पुलिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छात्रा का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। उसके कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और गूगल सर्च हिस्ट्री की जांच की जा रही है। साथ ही उस युवक की भी तलाश की जा रही है जिसने सबसे पहले सहेली को फोन कर छात्रा के फोन न उठाने की जानकारी दी थी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जिस बेटी को परिवार ने डॉक्टर बनने के सपनों के साथ घर से विदा किया था, अब उसी की मौत की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजन मध्य प्रदेश से हल्द्वानी के लिए रवाना हो चुके हैं। घर में मातम पसरा हुआ है और रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है।
हर पहलू से जांच में जुटी पुलिस
एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। परिजनों के पहुंचने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद मौत के कारणों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल एक होनहार छात्रा की असमय मौत ने न सिर्फ उसके परिवार के सपनों को तोड़ा है, बल्कि कई ऐसे सवाल भी छोड़ दिए हैं जिनके जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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