नैनीताल: 35 साल बाद नैनी झील में लौटी स्नोट्राउट, 300 मछलियों से सुधरेगा पारिस्थितिकी तंत्र
विलुप्त हो चुकी प्रजाति के संरक्षण से सुधरेगा झील का पारिस्थितिकी तंत्र
नैनीताल। कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने गुरुवार को नैनी झील में स्नोट्राउट मछली के संचय एवं संरक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। तल्लीताल स्थित सेंट जॉसेफ स्विमिंग हाउस के समीप मत्स्य केज में लगभग 300 स्नोट्राउट मछलियों का संचय किया गया।
आयुक्त ने बताया कि नैनी झील में 1990 के दशक से महाशीर (ट्रोप्टिटोरा) और स्नोट्राउट जैसी महत्वपूर्ण मछली प्रजातियां विलुप्त हो चुकी थीं। वर्ष 2005 में महाशीर प्रजाति का पुनः संवर्धन किया गया, जो अब अच्छी तरह विकसित हो चुकी है। वहीं, लगभग 35 वर्षों बाद स्नोट्राउट मछली का पुनः संचय कुमाऊं विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के सहयोग से संभव हो पाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्नोट्राउट मछली झील में पनप रही काई का भक्षण कर जल में नाइट्रोजन की मात्रा को संतुलित करने और ऑक्सीजन स्तर बढ़ाने में सहायक होगी। इससे झील के जल पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
इस परियोजना के तहत मछली के बीज का उत्पादन ट्रीटमेंट प्लांट में कर उसकी अंगुलिकाओं को तैयार किया गया और बाद में झील में छोड़ा गया। कार्यक्रम में कुमाऊं विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, नगर पालिका प्रतिनिधियों और अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया।
https://youtu.be/RkpEyKYHhLw?si=V78YGLPBHUuNcnar
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