केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन, प्रशासन की तत्परता से 10,450 श्रद्धालु सुरक्षित
भूस्खलन प्रभावित सोनप्रयाग–गौरीकुंड मार्ग पर SDRF और NDRF का संयुक्त रेस्क्यू अभियान
प्रशासन की तत्परता से SDRF–NDRF का संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान
रुद्रप्रयाग, 20 मई 2026: श्री केदारनाथ धाम यात्रा में 19 मई तक 6 लाख 94 हजार से अधिक श्रद्धालु सफलतापूर्वक दर्शन कर चुके हैं। यात्रा मार्ग पर लगातार श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है और प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखा जा रहा है।
बारिश के बाद भूस्खलन की स्थिति
इसी बीच 19 मई की रात्रि को हुई तेज बारिश के कारण सोनप्रयाग–गौरीकुंड मार्ग के मुनकटिया क्षेत्र सहित तीन अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन हो गया। इसके चलते मुख्य यात्रा मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए, जिससे स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई।
प्रशासन और राहत टीमों की त्वरित कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, SDRF, NDRF, पुलिस एवं अन्य राहत टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। रात्रि का समय, खराब मौसम और लगातार गिरते मलबे के बावजूद राहत कार्य को बिना रुके जारी रखा गया, ताकि यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा सके।
जिलाधिकारी की सतत निगरानी
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की और मौके पर मौजूद अधिकारियों से लगातार जानकारी लेते रहे। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग को शीघ्र से शीघ्र सुचारु किया जाए, ताकि किसी भी श्रद्धालु को परेशानी का सामना न करना पड़े।
पैदल मार्ग आंशिक रूप से बहाल
प्रशासन की तत्परता और समन्वित प्रयासों के चलते लगभग 30 मिनट के भीतर पैदल मार्ग को आंशिक रूप से खोल दिया गया। इसके बाद फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थानों की ओर भेजने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई, जिससे स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सका।
SDRF–NDRF का संयुक्त रेस्क्यू अभियान
SDRF उपनिरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और NDRF के साथ मिलकर संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। सेनानायक SDRF अर्पण यदुवंशी के निर्देशन में पूर्व तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया का बड़ा लाभ मिला, जिससे अभियान प्रभावी तरीके से संचालित हो सका।
10,450 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया
संयुक्त टीमों ने अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में सूझबूझ, धैर्य और साहस का परिचय देते हुए लगभग 10,450 श्रद्धालुओं को सुरक्षित रूप से मार्ग पार कराया। लगातार बारिश और अंधेरे के बीच जवानों ने यात्रियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
मार्ग पुनः सुचारु किया गया
रेस्क्यू कार्य पूरा होने के बाद जेसीबी मशीनों की सहायता से मार्ग पर आए भारी मलबे को हटाया गया। इसके बाद सड़क मार्ग को पुनः सुचारु कर दिया गया और वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से बहाल कर दी गई, जिससे यात्रा व्यवस्था फिर से पटरी पर आ सकी।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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