Dehradun Crime: कंपनी का MD बनकर WhatsApp पर 3.20 करोड़ की साइबर ठगी, आरोपी कोलकाता से गिरफ्तार
कंपनी के MD बनकर व्हाट्सऐप पर 3.20 करोड़ की ठगी का आरोपी एसटीएफ की गिरफ्त में
व्हाट्सऐप पर कंपनी के MD बनकर जनरल मैनेजर को झांसे में लिया, अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई रकम; एसटीएफ ने आरोपी के पास से मोबाइल, सिम और लैपटॉप बरामद किया
देहरादून, 27 अगस्त 2026। कंपनी के उच्चाधिकारी और मैनेजिंग डायरेक्टर बनकर व्हाट्सऐप के जरिए करीब 3.20 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने के मामले में उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने एक आरोपी को कोलकाता से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान चंद्रकांत मिश्रा निवासी ग्रीन फील्ड सिटी, महेशतल्ला, कोलकाता, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन, चार सिम कार्ड और एचपी कंपनी का लैपटॉप बरामद किया है।
व्हाट्सऐप पर कंपनी के एमडी बनकर बनाया भरोसा
मामला साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में दर्ज है। जांच में सामने आया कि साइबर ठगों ने कंपनी के जनरल मैनेजर से व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को कंपनी का उच्चाधिकारी और मैनेजिंग डायरेक्टर बताते हुए बातचीत शुरू की और प्रोजेक्ट से संबंधित एडवांस पेमेंट तथा अन्य जरूरी भुगतानों के नाम पर जनरल मैनेजर को विश्वास में लिया।
साइबर अपराधियों ने इस भरोसे का फायदा उठाते हुए जनरल मैनेजर से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई। इसी क्रम में श्याम ट्रेडिंग कंपनी के बैंक खाते में भी धनराशि भेजी गई। अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से ठगी की कुल रकम करीब 3.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
तकनीकी जांच के बाद कोलकाता पहुंची एसटीएफ
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने साइबर टीम को तकनीकी विश्लेषण और मैनुअल इनपुट के आधार पर आरोपियों की तलाश के निर्देश दिए।
जांच के दौरान साइबर टीम को महत्वपूर्ण सुराग मिले। इन सुरागों को विकसित करते हुए टीम कोलकाता पहुंची और संभावित ठिकाने की जानकारी जुटाने के बाद आरोपी चंद्रकांत मिश्रा को उसके निवास से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी साइबर ठगी के इस मामले में महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। अब उससे पूछताछ के जरिए ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम के लेनदेन से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
लैपटॉप में मिले कई महत्वपूर्ण दस्तावेज
प्रारंभिक जांच के दौरान आरोपी के लैपटॉप की जांच में विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं से संबंधित एडिटेबल दस्तावेज, बैंक लोन आवेदन, आधार कार्ड और पैन कार्ड की प्रतियां समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं।
पुलिस को आशंका है कि इन दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़े किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया गया हो सकता है। हालांकि, इसकी वास्तविक भूमिका जांच और फॉरेंसिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
आरोपी के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप को फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। डिजिटल उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर पुलिस व्हाट्सऐप बातचीत, संपर्कों, बैंक लेनदेन और अन्य डिजिटल गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
ठगी की रकम और सहयोगियों की तलाश में पूछताछ
एसटीएफ आरोपी से उसकी भूमिका, ठगी की रकम के लेनदेन और साइबर अपराध में शामिल अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि 3.20 करोड़ रुपये की रकम किन-किन खातों में पहुंची और इस पूरे नेटवर्क में आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी।
जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि आरोपी ने फर्जी पहचान, दस्तावेजों और बैंक खातों की व्यवस्था किसके माध्यम से की तथा इस साइबर ठगी की साजिश में उसके साथ और कौन-कौन लोग शामिल थे।
पहले गिरफ्तार हो चुके हैं तीन आरोपी
एसटीएफ के मुताबिक, इस मामले में इससे पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ न्यायालय में आरोप-पत्र भी दाखिल किया जा चुका है। अब चंद्रकांत मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
पुलिस का मानना है कि पूछताछ और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से इस मामले में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। एसटीएफ अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के साथ-साथ ठगी की रकम के अंतिम लाभार्थियों और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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