बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम मुद्दा: ग्रामीणों का बड़ा कदम, 4–6 मई को खुली चर्चा; सरकार-प्रशासन आमंत्रित
जन-जन की सरकार, कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार’ कार्यक्रम के जरिए सरकार और प्रशासन को आमने-सामने संवाद का न्योता
मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक सहित भाजपा प्रदेश व जिला अध्यक्ष को भेजा गया आमंत्रण पत्र, अधिकारियों को भी चर्चा में शामिल होने का न्योता
लालकुआं, 20 अप्रैल 2026: बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की लंबित प्रक्रिया को लेकर क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता और भ्रम के बीच ग्रामीणों ने अब खुली चर्चा का रास्ता अपनाया है। इसी क्रम में 4 से 6 मई 2026 तक ‘जन-जन की सरकार, कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर पारदर्शी संवाद की पहल की जाएगी।
इस संबंध में भाजपा मंडल बिंदुखत्ता के अध्यक्ष नवीन पपोला के माध्यम से मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को आमंत्रण भेजा गया है। कार्यक्रम में संबंधित अधिकारियों से भी वनाधिकार कानून के तहत बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम दावे पर खुली चर्चा में शामिल होने का आग्रह किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता के लोग पीढ़ियों से वनाश्रित हैं और वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत राजस्व ग्राम बनने की पात्रता रखते हैं। 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन करीब 16 माह बाद 17 अक्टूबर 2025 को यह पत्रावली यह कहते हुए लौटा दी गई कि निर्णय का अधिकार डीएलसी के पास ही है। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी नैनीताल ने अधिसूचना जारी करने के बजाय दावे के पुनः परीक्षण के आदेश दे दिए, जिससे मामला फिर लंबित हो गया।
वर्तमान में शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग बयानों से क्षेत्र में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि मामला अन्य स्तर पर भेजा गया, तो भविष्य में प्रतिकूल परिणाम सामने आ सकते हैं।
वनाधिकार समिति द्वारा राज्य निगरानी समिति को लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं प्रदेश में चल रहे ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम से बिंदुखत्ता को अलग रखे जाने से भी स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीणों ने स्वयं पहल कर इस कार्यक्रम के आयोजन का निर्णय लिया है। शिष्टमंडल के सदस्य उमेश भट्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार और प्रशासन के जिम्मेदार लोग इस चर्चा में शामिल नहीं होते हैं, तो इसे इस रूप में देखा जाएगा कि सरकार बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के प्रति गंभीर नहीं है।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस पहल को सकारात्मक रूप में स्वीकार करेगी और वर्षों से लंबित इस मुद्दे का समाधान निकालने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी।
इस शिष्टमंडल में उमेश भट्ट, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, पूर्व सैनिक रंजीत गड़िया, दीपक नेगी, किरन डालाकोटी, संध्या डालाकोटी, अर्जुन नाथ, बसंत पांडेय, बलवंत बिष्ट, बलवंत सम्मल, सचिन तिवारी, मोहनी मेहता, नवीन जोशी, भुवन शर्मा, भूपेश जोशी, कुंवर सिंह पवार और मीना कपिल सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।
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