बगलामुखी जयंती 2026: राप्ती तट पर कल भव्य आयोजन, 2 कुंतल लड्डू वितरण, सत्य साधक का संदेश
सत्य साधक विजेंद्र पांडे गुरु जी का संदेश—सनमार्ग पर चलें, सुख-समृद्धि की कामना
लखनऊ/श्रावस्ती। मां बगलामुखी जयंती की पूर्व संध्या पर सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरु जी ने सभी भक्तजनों के सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उन्हें सनमार्ग पर चलने का संदेश दिया है।
24 अप्रैल, शुक्रवार को श्रावस्ती जिले के राप्ती तट पर मां बगलामुखी जयंती का भव्य आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान दो कुंतल लड्डुओं का वितरण भी किया जाएगा।
गुरु जी ने अपने संदेश में बताया कि बगलामुखी जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह तिथि 24 अप्रैल को पड़ रही है। दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी को माता पार्वती का उग्र स्वरूप माना जाता है। उन्हें शत्रुओं पर विजय दिलाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
उन्होंने बताया कि मां बगलामुखी को पीतांबरा और ब्रह्मास्त्र रूपिणी जैसे नामों से भी जाना जाता है तथा उनका वाहन बगुला पक्षी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार सतयुग में एक भीषण तूफान से पृथ्वी के विनाश का संकट उत्पन्न हुआ था। तब भगवान विष्णु ने देवी की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर देवी सौराष्ट्र के हरिद्रा सरोवर में बगलामुखी रूप में प्रकट हुईं और पृथ्वी को विनाश से बचाया।
एक अन्य कथा के अनुसार, एक राक्षस ब्रह्मा के ग्रंथ चुराकर पाताल लोक में छिप गया था। तब देवी बगलामुखी ने बगुले का रूप धारण कर उसका वध किया और ग्रंथों को पुनः ब्रह्मा को सौंप दिया।
गुरु जी ने बताया कि वैदिक काल से ही सप्तऋषियों, देवर्षि नारद, भगवान विष्णु, परशुराम और द्रोणाचार्य जैसे महापुरुषों ने देवी की साधना की है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पूर्व भगवान कृष्ण ने पांडवों को भी मां बगलामुखी की साधना करवाई थी।
उन्होंने कहा कि रात्रि काल में मां बगलामुखी की साधना विशेष फलदायी मानी जाती है। देवी के भैरव महाकाल हैं और उनकी प्रतिमा में दाहिने हाथ में गदा तथा बाएं हाथ से दानव की जीभ पकड़े हुए उनका स्तंभन स्वरूप दर्शाया जाता है।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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