Uttarakhand News: ट्रेन की चपेट में आने से नर हाथी की मौत, हादसे की जांच शुरू
बाघ एक्सप्रेस की चपेट में आने से नर हाथी की मौत, जांच में जुटा वन विभाग।
हल्दी-छतरपुर रेलवे ट्रैक पर हादसा, हाथी का टूटा दांत रेलवे ने कब्जे में लिया; वन विभाग और रेलवे की टीमें जांच में जुटीं
रुद्रपुर/पंतनगर, 28 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हल्दी और छतरपुर रेलवे स्टेशनों के बीच मंगलवार देर रात बाघ एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक नर हाथी की मौत हो गई। हादसा तराई केंद्रीय वन प्रभाग की रुद्रपुर रेंज के अंतर्गत रेलवे ट्रैक के पिलर संख्या 55/8 के पास हुआ। ट्रेन लालकुआं से रुद्रपुर की ओर जा रही थी, तभी रेलवे ट्रैक पार कर रहा हाथी उसकी चपेट में आ गया।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि हाथी की मौके पर ही मौत हो गई और उसका एक दांत टूटकर अलग जा गिरा। हादसे के बाद रेलवे और वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही दोनों विभागों के अधिकारी और कर्मचारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
करीब दो घंटे बाधित रहा रेल संचालन
हादसे के बाद रेलवे ट्रैक पर हाथी का शव होने के कारण बाघ एक्सप्रेस करीब दो घंटे तक मौके पर खड़ी रही। इससे रेल यातायात प्रभावित हुआ। रेलवे और वन विभाग की टीमों ने समन्वय बनाकर हाथी के शव को ट्रैक से हटाने की कार्रवाई की। इसके बाद रेल संचालन बहाल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। रेलवे के अनुसार, ट्रेन में करीब एक हजार यात्री सवार थे और सभी सुरक्षित रहे।
हाथी का टूटा दांत रेलवे ने लिया कब्जे में
हादसे में हाथी का एक दांत टूटकर अलग हो गया था, जिसे रेलवे प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया। निर्धारित औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दांत वन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया की गई। वन विभाग की निगरानी में हाथी के शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद नियमानुसार शव के निस्तारण की कार्रवाई की गई।
वन विभाग ने शुरू की जांच
वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम के अनुसार, घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है और रेलवे अधिकारियों के साथ भी समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही को देखते हुए ट्रेन की गति नियंत्रित रखने और लगातार हॉर्न बजाने जैसे सुरक्षा उपायों पर जोर दिया।
हादसे के बाद ट्रेन की गति और वन्यजीवों की आवाजाही वाले क्षेत्र में निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी जांच की आवश्यकता सामने आई है। हालांकि, ट्रेन की वास्तविक गति और किसी तरह की लापरवाही के संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
हल्दी और छतरपुर रेलवे स्टेशनों के बीच का क्षेत्र हाथियों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है। इस हादसे ने वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही और रेल संचालन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को फिर रेखांकित किया है।
संवेदनशील रेलखंडों पर हाथियों की गतिविधियों की निगरानी, निर्धारित गति सीमा का पालन और रेलवे तथा वन विभाग के बीच त्वरित सूचना तंत्र को प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सके।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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