मजबूत इरादों ने थामी स्टेयरिंग—चंपावत की महिलाएं अब खुद लिख रहीं अपनी तकदीर
पिंक ई-रिक्शा बनी आत्मनिर्भरता की पहचान, छह महीने में बदली जिंदगी
चंपावत, 24 अप्रैल 2026। जनपद के नायकगोठ क्षेत्र की महिलाएं, जिनका जीवन कभी घरेलू कार्यों, पशुपालन और खेतिहर मजदूरी तक सीमित था, आज आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुकी हैं। सीमित आय, अनिश्चित रोजगार और सामाजिक बंधनों के बावजूद इन महिलाओं ने अपने मजबूत इरादों और सामूहिक प्रयासों से अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी।
इस बदलाव की शुरुआत तब हुई जब क्षेत्र की 10 महिलाओं ने एकजुट होकर ‘प्रेरणा स्वयं सहायता समूह’ का गठन किया। श्रीमती रामबेटी के नेतृत्व में समूह ने पारंपरिक कार्यों से आगे बढ़कर कुछ नया करने का निर्णय लिया। इसी दौरान उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति (UGVS) द्वारा संचालित और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास निधि (IFAD) से वित्त पोषित ‘ग्रामोत्थान परियोजना’ से उन्हें उद्यमिता का अवसर मिला।
परियोजना के सहयोग से समूह ने ‘पिंक ई-रिक्शा’ सेवा शुरू करने का अभिनव विचार प्रस्तुत किया, जिसे तकनीकी और आर्थिक सहायता भी मिली। इस योजना के तहत 10 लाख रुपये की परियोजना तैयार की गई, जिसमें 60 प्रतिशत यानी 6 लाख रुपये अनुदान के रूप में मिले, जबकि शेष राशि बैंक ऋण और समूह के अंशदान से जुटाई गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं इन महिला उद्यमियों को ई-रिक्शा की चाबियां सौंपकर उनका उत्साहवर्धन किया।
आज टनकपुर के मुख्य बाजार, बैराज क्षेत्र और रेलवे स्टेशन जैसे प्रमुख स्थानों पर दौड़ते पिंक ई-रिक्शा केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन चुके हैं। सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा के कारण इन महिलाओं ने कम समय में ही स्थानीय लोगों का विश्वास जीत लिया है।
महज छह महीनों में इस पहल ने बड़ा बदलाव लाया है। समूह की प्रत्येक महिला सदस्य अब करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह की नियमित आय अर्जित कर रही है। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे बैंक ऋण की किस्तें भी समय पर चुका रही हैं।
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