Crime News: डीएनए जांच में चौंकाने वाला खुलासा, शिक्षक नहीं नाबालिग निकला नवजात का पिता
पिथौरागढ़ में नाबालिग छात्रा से जुड़े दुष्कर्म मामले में डीएनए जांच से नया खुलासा।
पिथौरागढ़ में तीन महीने पहले शिक्षक के खिलाफ दर्ज हुआ था दुष्कर्म का मुकदमा, डीएनए जांच में नाबालिग निकला नवजात का पिता।
पिथौरागढ़, 5 नवंबर 2026। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में नाबालिग छात्रा से जुड़े दुष्कर्म और गर्भपात के मामले में डीएनए जांच रिपोर्ट ने जांच की दिशा बदल दी है। जिस शिक्षक के खिलाफ परिजनों की शिकायत पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, वह मृत नवजात का जैविक पिता नहीं निकला। फॉरेंसिक जांच में एक नाबालिग किशोर का डीएनए नवजात के जैविक नमूनों से मेल खा गया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने संबंधित किशोर को संरक्षण में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया, जहां से उसे अल्मोड़ा स्थित राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह भेजने के आदेश दिए गए।
मामला जुलाई 2026 का है। जानकारी के अनुसार, दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के गर्भवती होने का मामला सामने आया था। आरोप है कि उसे गर्भपात की दवा दी गई थी। दवा खाने के बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ गई और उसे अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। परिजन उसे तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को सूचना दी। बाद में छात्रा ने नवजात को जन्म दिया, जिसे जंगल में फेंक दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान जंगल से नवजात के अवशेष बरामद कर वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की।
शिक्षक के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा, दाखिल हो चुका था आरोपपत्र
पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने स्कूल के एक शिक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 65(1) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर 24 जुलाई 2026 को शिक्षक के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया था। इसी दौरान जांच को वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाते हुए मृत नवजात के जैविक नमूने डीएनए परीक्षण के लिए रुद्रपुर स्थित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए।
शिक्षक का डीएनए नहीं मिला, जांच में दो अन्य संदिग्ध आए सामने
प्रयोगशाला से प्राप्त रिपोर्ट में शिक्षक का डीएनए नवजात के नमूनों से मेल नहीं खाया। इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए अन्य संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल शुरू की। पुलिस ने दो अन्य संदिग्धों के रक्त नमूने 12 अक्टूबर को डीएनए परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे। जांच रिपोर्ट में इनमें से एक विधि-विवादित किशोर का डीएनए नवजात के जैविक नमूनों से मेल खाने की पुष्टि हुई।
3 नवंबर को पुलिस ने किशोर को संरक्षण में लिया
डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद पिथौरागढ़ पुलिस ने 3 नवंबर को संबंधित किशोर को अपने संरक्षण में लिया। इसके बाद उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। बोर्ड के आदेश पर किशोर को अल्मोड़ा स्थित राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। डीएनए जांच के इस खुलासे ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। अब इस प्रकरण में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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