धामी सरकार का भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति, तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट
हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई।
हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में 10 लोगों पर अभियोग दर्ज होगा, विजिलेंस जांच के बाद शासन की बड़ी कार्रवाई
देहरादून, 19 जून 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई सामने आई है। विजिलेंस की विस्तृत जांच और राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति के आधार पर प्रकरण में कथित अनियमितताओं, आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और सरकारी धन को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए जाने के बाद मामले से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों तथा भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध अभियोग दर्ज करने की मंजूरी दे दी गई है। साथ ही कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई की गई है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार वरुण चौधरी के विरुद्ध कठोर रुख अपनाते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजी जा रही है। इसके अतिरिक्त तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मामले में आपराधिक अभियोग दर्ज किए जाने वाले व्यक्तियों में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनन्द सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं। इनके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेन्द्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभियोग दर्ज किया जाएगा।
सरकार के अनुसार दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि भूमि क्रय-विक्रय की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं, जिसके कारण नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर राज्य सतर्कता समिति ने कठोर कार्रवाई की संस्तुति की थी।
गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरुआत से ही मामले को गंभीरता से लिया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच, वित्तीय परीक्षण और सतर्कता जांच के माध्यम से पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल कराई गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और जनधन की हानि के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। राज्य सरकार की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि जनहित और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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