“जन-जन की सरकार कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार”: राजस्व ग्राम मुद्दे पर 6 मई को बड़ी सभा, मुख्यमंत्री को आमंत्रण
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन तेज किया, सरकार और जनप्रतिनिधियों को खुली बहस के लिए कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता।
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। इसी क्रम में 6 मई 2026 को “जन-जन की सरकार कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार” कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पूर्व सैनिक संगठन और वनाधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने खटीमा में मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर उन्हें आमंत्रित किया है। साथ ही सरकार के जिम्मेदार प्रतिनिधियों को भी कार्यक्रम में उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता के निवासी पीढ़ियों से वनभूमि पर आश्रित हैं और वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत राजस्व ग्राम बनने की सभी पात्रताएं पूरी करते हैं। बताया गया कि 8 जुलाई 2023 को इस संबंध में दावा प्रस्तुत किया गया था, जिसके बाद 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति (डीएलसी) ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव शासन को भेज दिया था।
हालांकि लगभग 16 महीने बाद 17 अक्टूबर 2025 को बिना किसी आपत्ति के यह कहते हुए पत्रावली वापस कर दी गई कि निर्णय का अधिकार डीएलसी को ही है। इसके बाद 11 नवंबर 2025 को जिलाधिकारी नैनीताल ने अधिसूचना जारी कराने के बजाय मामले के पुनः परीक्षण के आदेश दे दिए, जिससे मामला फिर लंबित हो गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के विरोधाभासी बयानों से स्थिति और अधिक भ्रमित हो गई है। एक ओर शासन निर्णय डीएलसी पर छोड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर वन भूमि के अनारक्षण के लिए मामला केंद्र और सर्वोच्च न्यायालय को भेजने की बात कही जा रही है, जिससे क्षेत्र के लोगों में असमंजस और भय का माहौल है।
ग्रामीणों के अनुसार 3 फरवरी 2026 को प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्देश प्राप्त किए थे, लेकिन अगले ही दिन दिए गए सार्वजनिक बयान से स्थिति फिर अस्पष्ट हो गई। वनाधिकार समिति द्वारा राज्य निगरानी समिति, देहरादून को अब तक छह बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी को लेकर 6 मई को प्रस्तावित कार्यक्रम में सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, ताकि वनाधिकार कानून के तहत बिंदुखत्ता के दावे पर सार्वजनिक रूप से चर्चा हो सके और लोगों के मन में व्याप्त भ्रम और भय को दूर किया जा सके। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाते हुए कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करेगी और बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की दिशा में ठोस निर्णय लेगी।
इस दौरान शिष्टमंडल में वनाधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट, सचिव बलवंत बिष्ट, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कैप्टन खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन हीरा सिंह बिष्ट, कैप्टन नर सिंह बिष्ट, भगत सिंह बिष्ट और बसंत पांडेय सहित कई लोग शामिल रहे।
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
हमारे व्हाट्सएप समाचार ग्रुप से जुड़ें
फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ को लाइक करें
टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ने के लिए क्लिक करें
हमारे इस नंबर 9927164214 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ें


