Uttarakhand News: तिहरे हत्याकांड में फांसी की सजा रद्द, मां, भाई और गर्भवती भाभी की थी हत्या
तिहरे हत्याकांड में फांसी की सजा रद्द, इलाज के बाद रिहाई के निर्देश
मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के मामले में हाईकोर्ट का फैसला; मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में आरोपी के मानसिक रूप से बीमार होने का उल्लेख
नैनीताल/देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तिहरे हत्याकांड के मामले में दोषसिद्ध आरोपी की फांसी की सजा रद्द कर दी है। आरोपी को अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या के मामले में निचली अदालत ने मृत्युदंड सुनाया था। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने राज्य सरकार को आरोपी का इलाज कराने और उसके बाद रिहा करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला वर्ष 2014 में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या से जुड़ा है। आरोपी को निचली अदालत ने अगस्त 2021 में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय आरोपी की मानसिक स्थिति पर उचित विचार नहीं किया गया था और मेडिकल रिपोर्ट में भी उसके मानसिक रूप से बीमार होने की बात सामने आई थी।
मेडिकल रिपोर्ट और मानसिक स्थिति बनी सुनवाई का प्रमुख आधार
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ ने न्यायमित्र के रूप में पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि मृत्युदंड पाए संजय सिंह की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है। मेडिकल बोर्ड ने भी उसे मानसिक रूप से बीमार बताया था। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अपने कृत्यों के परिणामों को समझने में सक्षम नहीं था, हालांकि इलाज के बाद उसके ठीक होने की संभावना जताई गई थी।
बचाव पक्ष का कहना था कि निचली अदालत ने मृत्युदंड सुनाते समय आरोपी की मानसिक स्थिति से जुड़े इस महत्वपूर्ण पहलू पर समुचित विचार नहीं किया। इसी आधार पर मामले में दोबारा सुनवाई किए जाने की मांग की गई।
हाईकोर्ट ने दोबारा विचार के लिए निचली अदालत को भेजा था मामला
इससे पहले हाईकोर्ट ने मृत्युदंड से जुड़े मामले में आरोपी की मेडिकल स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य के पहलू पर विचार करने के लिए प्रकरण को दोबारा सुनवाई हेतु विचारणीय न्यायालय को भेजा था। अदालत ने राज्य सरकार से आरोपी से संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन करने और यह देखने को कहा था कि घटना के समय वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित तो नहीं था। साथ ही, यह भी विचार करने को कहा गया था कि मृत्युदंड सुनाते समय कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट तो नहीं गया।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद निचली अदालत ने मामले की दोबारा सुनवाई की। इस दौरान आरोपी की मानसिक स्थिति और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार किया गया। हालांकि, निचली अदालत ने अपने पूर्व के आदेश में बदलाव करने से इनकार करते हुए मृत्युदंड की सजा को बरकरार रखा।
निचली अदालत ने मृत्युदंड में बदलाव से किया था इनकार
दोबारा सुनवाई के बाद विचारणीय न्यायालय ने कहा था कि घटना के समय आरोपी की ऐसी किसी बीमारी से पीड़ित होने की पुष्टि नहीं हुई, जिसके आधार पर पूर्व के फैसले में बदलाव किया जा सके। अदालत ने सभी तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद माना कि उसके पूर्व के आदेश में संशोधन की गुंजाइश नहीं है।
निचली अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि आरोपी ने तलवार से हमला कर अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की हत्या की थी। इस आधार पर उसने मृत्युदंड के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में मानसिक स्थिति से जुड़े पहलू पर फिर दलीलें रखी गईं।
क्या है पूरा मामला?
मामला टिहरी गढ़वाल जिले के गुमाल गांव का है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 13 दिसंबर 2014 को संजय सिंह ने मामूली बात को लेकर अपनी मां, बड़े भाई और गर्भवती भाभी की तलवार से हत्या कर दी थी। घटना की रिपोर्ट आरोपी के पिता राम सिंह पंवार ने दर्ज कराई थी।
इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने अगस्त 2021 में संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ठ को न्यायमित्र नियुक्त किया, ताकि आरोपी की ओर से कानूनी पक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
न्यायमित्र ने अदालत के समक्ष आरोपी की मानसिक बीमारी और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों पर समुचित विचार किए बिना मृत्युदंड दिया गया था। अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आरोपी का उपचार कराने और इलाज के बाद उसे रिहा करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आरोपी की मानसिक स्थिति, मेडिकल रिपोर्ट और मृत्युदंड से जुड़े कानूनी पहलुओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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