Uttarakhand Energy Saving Guidelines: उत्तराखंड में वर्क फ्रॉम होम समेत ईंधन-ऊर्जा बचत को लेकर नई गाइडलाइन जारी
उत्तराखंड सरकार ने ईंधन और ऊर्जा बचत को लेकर नई गाइडलाइन जारी की (सांकेतिक तस्वीर)
वर्क फ्रॉम होम, ‘नो व्हीकल डे’, सार्वजनिक परिवहन और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देश
देहरादून,15 मई 2026। वैश्विक स्तर पर बढ़ते ऊर्जा संकट, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के बीच उत्तराखंड सरकार ने ईंधन बचत, ऊर्जा संरक्षण और सरकारी मितव्ययता को लेकर व्यापक गाइडलाइन जारी कर दी है। शासन की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों में वर्क फ्रॉम होम, सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन, सरकारी खर्चों में कटौती, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग जैसे कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है।
मुख्य सचिव की ओर से जारी आदेश में सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्राथमिकता देते हुए तय दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। शासन ने साफ कहा है कि कोविड महामारी के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर बढ़े दबाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिमी एशिया संकट के कारण ईंधन, खाद्य पदार्थों और अन्य संसाधनों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
वर्क फ्रॉम होम और डिजिटल सिस्टम पर जोर
सरकार ने सरकारी विभागों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बैठकों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही अधिकारियों और कर्मचारियों की भौतिक उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। निजी क्षेत्र को भी वर्क फ्रॉम होम (WFH) व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है।
शासन का मानना है कि डिजिटल कार्य प्रणाली को बढ़ावा देने से वाहनों की आवाजाही कम होगी और ईंधन की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकेगी।
सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के उपयोग पर फोकस
नई गाइडलाइन में निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया है। शासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही है।
इसके साथ ही कार पूलिंग और साइकिलिंग संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार हफ्ते में एक दिन “नो व्हीकल डे” लागू करने की संभावना पर भी काम कर रही है।
वीआईपी काफिलों और सरकारी खर्चों में कटौती
सरकारी मितव्ययता को लेकर जारी निर्देशों में वीआईपी काफिलों और सरकारी वाहनों की संख्या कम करने पर भी जोर दिया गया है। शासन ने अनावश्यक सरकारी खर्च, विदेशी यात्राओं और कंसल्टेंसी असाइनमेंट्स को सीमित करने की बात कही है।
इसके अलावा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को वर्चुअल मीटिंग और हाइब्रिड गवर्नेंस प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ईंधन और संसाधनों की बचत की जा सके।
AC का तापमान 24 से 26 डिग्री रखने के निर्देश
ऊर्जा संरक्षण के तहत सरकारी और निजी भवनों में एयर कंडीशनर का तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने अनावश्यक रूप से एसी के उपयोग को हतोत्साहित करने की बात कही है।
मॉल, होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सजावटी रोशनी और अतिरिक्त बिजली खपत को सीमित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर ऊर्जा को बढ़ावा
राज्य सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार करने के निर्देश दिए हैं। लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रेरित करने पर भी विशेष फोकस किया गया है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने, नेट मीटरिंग अनुमोदनों में तेजी लाने और गोवर्धन योजना के तहत कंप्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं को गति देने की बात कही गई है।
होटल और सरकारी आवासों में PNG को प्राथमिकता
गाइडलाइन में होटल, रेस्टोरेंट और सरकारी आवासों में PNG और LPG के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया गया है। शासन का उद्देश्य गैस संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और आयात निर्भरता कम करना है।
साथ ही Municipal Solid Waste को CBG Feedstock के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में भी कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा
सरकार ने सरकारी खरीद में “मेक इन इंडिया” नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। त्योहारों और शादी समारोहों में भारतीय उत्पादों और हस्तशिल्प के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील भी की गई है।
शासन ने आम लोगों से सोने की अनावश्यक खरीद को सीमित रखने की अपील करते हुए पुराने आभूषणों के री-डिजाइन और पुनः उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही है।
खाद्य तेल की खपत कम करने और प्राकृतिक खेती पर जोर
सरकार ने खाद्य तेल की खपत कम करने और तेल वाली फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम शुरू किया है। स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी कैंटीनों में तेल के उपयोग की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, स्थानीय उत्पादन और संसाधनों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने की बात भी गाइडलाइन में शामिल की गई है।
निवेश परियोजनाओं को मिलेगी तेजी
आदेश में माइनिंग, सोलर और पावर प्रोजेक्ट्स की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करने, सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम विकसित करने और स्टेट लेवल एंपावर्ड कमेटियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
निवेश परियोजनाओं की निगरानी और फास्ट ट्रैक अप्रूवल व्यवस्था विकसित करने पर भी सरकार ने जोर दिया है ताकि ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिल सके।
ऊर्जा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की तैयारी
शासन ने “मेरा भारत, मेरा योगदान” जैसे जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकारी नीति तक सीमित न रहे बल्कि आम लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बने।
उत्तराखंड सरकार की यह नई गाइडलाइन केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक मितव्ययता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यापक रणनीति के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में इन दिशा-निर्देशों का असर सरकारी कामकाज से लेकर आम लोगों की दिनचर्या तक दिखाई दे सकता है।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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