पिथौरागढ़ में दर्दनाक हादसा: चलती गाड़ी पर गिरी चट्टान, दो लोगों की मौत; चार गंभीर घायल
पिथौरागढ़ हादसे के बाद क्षतिग्रस्त वाहन और रेस्क्यू ऑपरेशन करती टीम
धारचूला के पंपाबे क्षेत्र में हुआ हादसा, आदि कैलाश दर्शन से लौट रहे परिवार के चार सदस्य गंभीर रूप से घायल।
पिथौरागढ़,12 जून 2026। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। धारचूला तहसील मुख्यालय से करीब 42 किलोमीटर दूर पंपाबे क्षेत्र में पर्यटकों की एक बोलेरो गाड़ी पर अचानक पहाड़ी से विशाल चट्टान गिर गई। हादसे में वाहन चालक समेत दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी पर्यटक राजस्थान से उत्तराखंड भ्रमण पर आए थे और आदि कैलाश व ओम पर्वत के दर्शन कर लौट रहे थे।
पंपाबे के पास हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार राजस्थान के कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र से एक ही परिवार के सदस्य उत्तराखंड यात्रा पर आए थे। श्रद्धालुओं ने पहले आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन किए, जिसके बाद वे दारमा घाटी स्थित पंचाचूली बेस कैंप घूमने गए। शुक्रवार दोपहर करीब 1:30 बजे पंचाचूली क्षेत्र से लौटते समय पंपाबे के पास उनकी बोलेरो गाड़ी पर पहाड़ी से एक विशाल बोल्डर आ गिरा।
वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चट्टान सीधे वाहन के अगले हिस्से पर गिरी, जिससे बोलेरो का फ्रंट हिस्सा पूरी तरह पिचक गया। हादसे में चालक और आगे की सीट पर बैठे एक किशोर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय प्रशासन और राहत दल ने घायलों को तत्काल उप जिला चिकित्सालय धारचूला पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।

मृतकों और घायलों की पहचान
हादसे में वाहन चालक सुरेंद्र गर्ब्याल (50 वर्ष) पुत्र किशन सिंह, निवासी गर्ब्यांग, धारचूला तथा केशव खंडेलवाल (15 वर्ष) पुत्र अजींद्र सिंह, निवासी रामगंज मंडी, जिला कोटा (राजस्थान) की मृत्यु हो गई।
घायलों में ऋषभ खंडेलवाल (30 वर्ष), राघव खंडेलवाल (17 वर्ष), रुणि खंडेलवाल (26 वर्ष) तथा आयुष खंडेलवाल (24 वर्ष) शामिल हैं। सभी राजस्थान के कोटा जिले के निवासी बताए गए हैं।
जिलाधिकारी ने दिए सुरक्षा संबंधी निर्देश
घटना के बाद पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगाईं ने सीमांत एवं दुर्गम क्षेत्रों में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) तथा दारमा एवं व्यास घाटी में कार्यरत संबंधित संस्थाओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जिलाधिकारी ने सभी चिन्हित डेंजर जोन में तत्काल सायरन व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भूस्खलन, पत्थर गिरने अथवा अन्य प्राकृतिक खतरों की स्थिति में यात्रियों और स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।
संवेदनशील क्षेत्रों में बढ़ाई जाएगी निगरानी
जिलाधिकारी ने बीआरओ अधिकारियों को सभी संवेदनशील और जोखिम वाले स्थलों का स्पष्ट चिह्नीकरण करने तथा पर्याप्त संख्या में चेतावनी संकेतक लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि साइन बोर्ड पर खतरे संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित की जाए, जिससे यात्रियों को मार्ग की स्थिति और संभावित जोखिमों की पूर्व जानकारी मिल सके।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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