उधम सिंह नगर में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: दो अवैध मजारें तड़के बुलडोजर से ध्वस्त
दो महीने पहले नोटिस के बावजूद दस्तावेज न देने पर कार्रवाई, आरक्षित वन भूमि से हटाया गया अतिक्रमण
रुद्रपुर ,06 अप्रैल 2026: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में सोमवार तड़के वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरक्षित वन भूमि पर बनी दो अवैध मजारों को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई सुबह 5 बजे से पहले शुरू की गई, जिससे पूरे क्षेत्र में प्रशासन की सख्ती का स्पष्ट संदेश गया।
दो महीने पहले जारी किया गया था नोटिस
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन अवैध संरचनाओं को हटाने से पहले संबंधित पक्षों को करीब दो महीने पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि यदि निर्माण वैध है तो उसके भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं, अन्यथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
किच्छा-सितारगंज वन क्षेत्र में किया गया था अवैध निर्माण
डीएफओ हिमांशु बागड़ी ने बताया कि किच्छा-सितारगंज वन क्षेत्र (डोला) और पुलभट्टा फॉरेस्ट रेंज में आरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से इन मजारों का निर्माण किया गया था। उन्होंने कहा कि नोटिस देने के बावजूद खादिमों द्वारा कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया और न ही कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
समय सीमा खत्म होने के बाद हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
वन विभाग ने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। विभाग की टीम ने दोनों अवैध संरचनाओं को पूरी तरह हटाकर मलबा भी जंगल क्षेत्र से बाहर कर दिया, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
वन विभाग और जिला प्रशासन ने मिलकर लिया निर्णय
इस पूरी कार्रवाई में स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया गया। एडीएम पंकज उपाध्याय ने बताया कि इस मामले में वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच पहले से ही विचार-विमर्श किया गया था। सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही यह कार्रवाई की गई, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही धामी सरकार
आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार सरकारी जमीनों से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। इसी के तहत प्रदेशभर में अब तक करीब 577 अवैध संरचनाओं को हटाकर करोड़ों की सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है।
आगे भी जारी रहेगी सख्त कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने साफ कर दिया है कि आरक्षित वन भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में चिन्हित अन्य अवैध ढांचों के खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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