हल्द्वानी: जमरानी बांध परियोजना को मिली रफ्तार, 57 हजार हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित
एडीएम ने किया नहर निर्माण कार्यों का निरीक्षण, गुणवत्ता और प्रगति पर जताया संतोष
हल्द्वानी, 26 मार्च 2026। जमरानी बांध बहुद्देशीय परियोजना के तहत नहरों के निर्माण एवं रिमॉडलिंग कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह महत्वाकांक्षी परियोजना काठगोदाम बैराज से लगभग 10 किलोमीटर अपस्ट्रीम गौला नदी पर विकसित की जा रही है, जिसका निर्माण वर्ष 2024 में शुरू हो चुका है। परियोजना के पूर्ण होने पर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कई जिलों को सिंचाई सुविधा का बड़ा लाभ मिलेगा।
परियोजना के अंतर्गत काठगोदाम बैराज से निकलने वाली गौलापार नहर, गौलावार मुख्य नहर तथा इससे जुड़ी फीडर नहरों के माध्यम से सिंचाई जल का वितरण किया जाएगा। गोलावार फीडर नहर हल्द्वानी शहर से होते हुए बरेली रोड स्थित इंडेन गैस प्लांट तक जाती है, जहां से हरिपुरा और पाहा फीडर नहरें आगे निकलती हैं।
चार जिलों को मिलेगा लाभ, यूपी के साथ समझौते के तहत होगा जल वितरण
उत्तर प्रदेश सरकार के साथ हुए समझौते के अनुसार हरिपुरा जलाशय से रामपुर और किच्छा बैराज से बरेली को सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर जिले को भी इन नहरों के माध्यम से पानी दिया जाएगा।
परियोजना के पूर्ण होने पर नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, बरेली और रामपुर जिलों में कुल 57,065 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा।
40 किमी नहरों का हो रहा पुनर्निर्माण, 17 किमी कार्य पूरा
सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए परियोजना के तहत मुख्य नहरों का रिमॉडलिंग और रेनोवेशन कार्य जारी है। इसमें गौलावार मुख्य नहर (1.1 किमी), गौलावार फीडर नहर (16.3 किमी), हरिपुरा फीडर नहर (15 किमी) और पाहा फीडर नहर (8.42 किमी) शामिल हैं। कुल 40.82 किमी लंबाई में से अब तक 17.38 किमी कार्य पूरा किया जा चुका है।
हरिपुरा फीडर नहर का किया निरीक्षण, तकनीकी गुणवत्ता पर फोकस
गुरुवार को अपर जिलाधिकारी (राजस्व) शैलेंद्र सिंह नेगी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने परियोजना के तहत निर्माणाधीन नहरों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान 15 किमी लंबी हरिपुरा फीडर नहर के निर्माण कार्यों का जायजा लिया गया।
निरीक्षण के दौरान रेगुलेटर, प्रोटेक्शन वर्क, फॉल और क्रॉस ड्रेनेज (CD) जैसे तकनीकी कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा की गई।
वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर विशेष ध्यान
परियोजना में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एलिफेंट स्टेप्स, रेप्टाइल क्रॉसिंग जैसे विशेष प्रावधान भी किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की इस पहल की सराहना की।
वृक्षों के कारण आ रही बाधा, 10 गुना वृक्षारोपण की योजना
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि नहर के तल और किनारों पर लगभग 1090 पेड़ होने के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। इनके कटान की अनुमति शासन स्तर पर विचाराधीन है।
वन विभाग द्वारा प्रभावित पेड़ों के बदले 10 गुना वृक्षारोपण किया जाएगा, वहीं परियोजना इकाई भी नहर किनारे व्यापक पौधारोपण करेगी।
अपर जिलाधिकारी ने परियोजना से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाते हुए कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उपमहाप्रबंधक ललित कुमार, परियोजना प्रबंधक मोहम्मद शाहनवाज, क्षेत्रीय अभियंता एवं कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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