गुरु पूर्णिमा: सत्य साधक ने की सभी भक्तजनों की सुख- समृद्धि की कामना, दिया यह संदेश
Guru Purnima 2023: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जय मां पीतांबरी साधना एवं दिव्य योग ट्रस्ट के संस्थापक सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने सभी भक्तजनों को सुख- समृद्धि आशीर्वाद देते हुए कहा कि
हिन्दू कैलेंडर के आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ‘गुरुपूर्णिमा’ का पर्व पूरी श्रृद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को कई पुराणों, शास्त्रों, चारों वेदों को विभाजित करने वाले एवं हिन्दू धर्म के महाग्रंथ श्री महा भगवतगीता की रचना करने वाले महर्षि वेदव्यास जी का भी जन्म हुआ था।
उनकी जयंती के उपलक्ष्य में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाता है और इस पर्व को व्यास पूर्णिमा और व्यास जयंती के नाम से भी जाना जाता है। महार्षि वेद व्यास जी को गुरु-शिष्य परंपरा का प्रथम गुरु माना गया है।
गुरु हर किसी के जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है गुरु के महत्व और इसके मूल्यों को सिर्फ शब्दों में नहीं पिरोया जा सकता है। गुरु हमारे जीवन में सभी अंधकारों को मिटाकर हमें प्रकाश की तरफ आगे बढ़ाता है और सही मार्गदर्शन कर हमें सफलता के पथ पर आगे बढ़ाता है।
इसलिए हिन्दू धर्म के शास्त्रों में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है। गुरु के बिना कोई भी व्यक्ति ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता है और न ही अपने जीवन में सफलता हासिल कर सकता है।
गुरु के बिना के किसी भी व्यक्ति का जीवन बिना नाविक के नाव की तरह होता है। जिस तरह बिना नाविक के नाव दिशाहीन होकर चलती है या फिर बेसहारा भंवर में फंस जाती है,ठीक उसी तरह बिना गुरु के मनुष्य जीवन रूपी भंवर में फंसा रहता है और दिशाहीन हो जाता है, उसे यह कभी ज्ञात नहीं होता है कि उसे जाना किस तरफ है।
गुरु अपनी पूरी जिंदगी अपने शिष्य को योग्य और सफल बनाने के लिए समर्पित कर देते हैं। इसलिए हमारे हिन्दू धर्म और शास्त्रों में गुरुओं को विशिष्ट स्थान दिया गया है और गुरु का भगवान का रुप मानकर गुरु पूर्णिमा के दिन उनका पूजन किया जाता है और उनके प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है।
सत्य साधक गुरु जी ने अपने संदेश में कहा कि गुरु हमेशा अपने शिष्य को सही राह दिखाते हैं। गुरु जब शिष्य पर कृपा करता है तो उसके सुख-दुख वह खुद अपने हाथों में ले लेता है। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा होती है तभी ईश्वर से साक्षात्कार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन दिवस पर हम अपने शैक्षणिक व आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान करते हैं, उनके प्रति अपनी श्रद्धा व आभार प्रकट करते हैं। इस संसार में जब भी हम कोई विषय सीखना चाहते हैं तो हम ऐसे इंसान के पास जाते हैं जो उसमें निपुण हो और हमें भी वो विषय पढ़ा सकता हो । इसी प्रकार एक पूर्ण सतगुरु अध्यात्म के विषय में निपुण होता है और यदि हम अपना आध्यात्मिक विकास करना चाहते हैं तो हमें सतगुरु के पास जाना होता है।
उन्होंने कहा कि सतगुरु दया से भरपूर होते हैं। वे हमें तकलीफ में नहीं देख सकते। सतगुरु हमें कर्मों के कीचड़ से दूर रहने की शिक्षा देने के लिए इस संसार में आते हैं। वे चाहते हैं कि हम कर्मों के चक्र से बाहर निकलें, जिसमें उलझकर हम बार-बार इस संसार में आते हैं। यदि हम इस मानव चोले के उद्देश्य को पूरा करना चाहते हैं और अपनी आत्मा का मिलाप परमात्मा में करवाना चाहते हैं, तो हमें एक पूर्ण सतगुरु के चरण-कमलों में आना ही होगा । हमें प्रभु से यही प्रार्थना करनी चाहिए कि वे हमें शीघ्र अति शीघ्र पूर्ण सतगुरु की शरण में पहुंचा दें ताकि उनके समर्थ मार्गदर्शन में हम जल्द से जल्द अपनी रूहानी यात्रा पूरी कर लें और अपने निजधाम वापस पहुंचकर सदा-सदा के लिए प्रभु में लीन हो जाएं।

सत्य साधक ने कहा विद्यालय के गुरू, आपको स्कूल के बाद क्या करना है, क्या बनना है इसकी शिक्षा देंगे। माता पिता भी गुरू की तरह ही होते हैं। जो समय समय पर मार्ग दर्शन करते हैं। परंतु आध्यात्मिक गुरु एक ऐसा गुरू होता है जो न केवल मोक्ष की ओर अग्रसर करता है बल्कि सभी प्रकार से सुख समृद्धि के रास्ते खोलता है, जन्म मरण से छुटकारा दिलाता है। वह तत्वज्ञान से परिचित करवाता है, भाग्य के कष्टों को दूर करता है और जो भाग्य में न हो वह देता है।
सत्य साधक गुरु जी ने कहा कि हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का काफी महत्व है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। गुरु पूजा और श्री व्यास पूजा के लिए पूर्णिमा तिथि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा का पर्व आज 3 जुलाई, सोमवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन गुरु के आशीर्वाद से व्यक्ति धन- संपत्ति, सुख- शांति और यश की वरदान प्राप्ति होती है। गुरु पूर्णिमा के दिन ही वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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