बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज, मुख्यमंत्री से अधिसूचना की गुहार- Nainital News-
वन अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की उठाई मांग
ग्रामीणों ने मंत्री और विधायक के बयानों पर भी उठाए सवाल
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आज तहसीलदार लालकुआँ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। इस दौरान ग्रामीणों ने राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए बजट सत्र के दौरान वन मंत्री और स्थानीय विधायक के बयानों पर सवाल उठाए तथा वन अधिकार कानून के अंतर्गत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना जारी करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि वन मंत्री द्वारा दिया गया यह बयान कि बिंदुखत्ता को केवल 73 वर्ष हुए हैं, कानून सम्मत नहीं है। इसके अतिरिक्त स्थानीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के उस बयान पर भी आपत्ति दर्ज की गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम संबंधी दावे को जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है तथा बिंदुखत्ता में केवल 129 परिवार ही निवास करते थे।
वन मंत्री और विधायक के बयानों का जवाब देते हुए वन अधिकार समिति ने बताया कि हाल ही में हरिद्वार और रामनगर क्षेत्र के जिन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया है, उनकी बसासत भी मात्र 50 से 60 वर्ष पुरानी थी। वन अधिकार कानून के प्रावधानों के अंतर्गत तीन पीढ़ियों के आधार पर उन्हें राजस्व ग्राम घोषित किया गया।
विधायक द्वारा 129 परिवारों का उल्लेख किए जाने पर समिति ने आपत्ति जताते हुए कहा कि वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1968 में ही बिंदुखत्ता में लगभग 5100 परिवार निवास कर रहे थे। इसके अलावा हरिद्वार और रामनगर के जिन गांवों को राजस्व ग्राम बनाया गया है, वहां भी बसासत के समय मूल परिवारों की संख्या और अधिसूचना जारी होने के समय निवास कर रहे परिवारों की संख्या में काफी अंतर है। समय के साथ परिवारों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में बिंदुखत्ता के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। देश भर में 1600 से अधिक वन गांवों को राजस्व का दर्जा मिल चुका है जिसमें 3 हजार हेक्टेयर तक के बड़े दावे भी शामिल हैं। फिर बिंदुखत्ता क्यों नहीं यह भी एक बड़ा प्रश्न है।
समिति ने यह भी सवाल उठाया कि जो डबल इंजन की सरकार आधा बीघा भूमि पर क्रियाशाला तथा 4.9 हेक्टेयर भूमि पर शहीद मोहन नाथ गोस्वामी स्टेडियम के निर्माण के लिए पिछले 10 वर्षों से भूमि हस्तांतरण नहीं करा पा रही है, वह बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार से 3470 हेक्टेयर भूमि को अनारक्षित कैसे करा पाएगी।
समिति का कहना है कि सरकार और जनप्रतिनिधियों को बिंदुखत्ता के साथ दोहरा मापदंड अपनाने के बजाय वनाधिकार कानून के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की अधिसूचना शीघ्र जारी करनी चाहिए।
इस दौरान वन अधिकार समिति के कोषाध्यक्ष कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, सदस्य उमेश भट्ट, कविराज धामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कैप्टन खिलाफ सिंह दानू, राज्य आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखंडी, महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव बीना जोशी, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, भगवान सिंह माजिला, बलवंत सम्मल, नवीन जोशी, पूर्व सैनिक कैप्टन इन्द्र सिंह पनेरी, रणजीत सिंह, दीपक नेगी, खुशाल सिंह कोश्यारी, आन सिंह धामी, नंदन तुलेड़ा, बलवंत सिंह, कुंवर सिंह पवार, मुन्नी जोशी, विशन राम, पूजा दानू माधो सिंह, आरती बसेड़ा, भगवती पांडेय, किरन पाठक सहित दो दर्जन से अधिक लोग उपस्थित रहे।
शहीद मोहन नाथ गोस्वामी स्टेडियम का निर्माण जल्द शुरू करने की मांग
समिति ने मांग उठाई है कि वर्ष 2015 की मुख्यमंत्री घोषणा में शामिल अशोक चक्र से सम्मानित बिंदुखत्ता निवासी शहीद मोहन नाथ गोस्वामी के नाम पर प्रस्तावित और पिछले 11 वर्षों से लंबित खेल स्टेडियम की भूमि हस्तांतरण की कार्यवाही शीघ्र पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराये जाएं।
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