Dehradun Crime: नाबालिग की किडनैपिंग निकली साजिश, मां ने डेढ़ लाख में किया था बेटी का सौदा
गिरफ्तार आरोपी: देहरादून के नाबालिग प्रकरण में गिरफ्तार चारों आरोपी पुलिस अभिरक्षा में।
राजपुर थाना पुलिस ने मुजफ्फरनगर से 15 वर्षीय किशोरी को सकुशल बरामद किया, जांच में अपहरण की कहानी निकली झूठी; मां समेत चार आरोपी गिरफ्तार, मानव तस्करी के नेटवर्क की भी जांच शुरू।
देहरादून, 3 अगस्त 2026। राजधानी देहरादून में नाबालिग किशोरी के कथित अपहरण के मामले में पुलिस जांच ने ऐसा खुलासा किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया। जिस महिला ने अपनी 15 वर्षीय बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, पुलिस जांच में वही अपनी बेटी को आर्थिक तंगी के चलते डेढ़ लाख रुपये में बेचने की आरोपी निकली। पूरी रकम नहीं मिलने और मामला खुलने के डर से उसने अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।
राजपुर थाना पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया है। मामले में पीड़िता की मां समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस पूरे प्रकरण को मानव तस्करी के एंगल से भी जांच रही है।
पांच जुलाई को दर्ज हुई थी अपहरण की रिपोर्ट
पुलिस के अनुसार, राजपुर थाना क्षेत्र निवासी महिला ने 5 जुलाई को अपनी 15 वर्षीय बेटी के कथित अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विशेष टीम गठित की गई। नाबालिग की तलाश के लिए मोबाइल सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मैनुअल पुलिसिंग का सहारा लिया गया।
मुजफ्फरनगर से सकुशल बरामद हुई किशोरी
जांच के दौरान पुलिस को नाबालिग के उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर मनीष और लवी कुमार को गिरफ्तार किया तथा नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि लवी कुमार ने पिंकी मलिक के माध्यम से नाबालिग को उसकी मां से डेढ़ लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद उसने विवाह कराने के उद्देश्य से नाबालिग को दो लाख रुपये में मनीष को बेच दिया।
मां ने कबूला जुर्म
इस खुलासे के बाद पुलिस ने पिंकी मलिक को मुजफ्फरनगर और पीड़िता की मां को देहरादून से गिरफ्तार किया। पूछताछ में मां ने स्वीकार किया कि उसकी मुलाकात पिंकी मलिक से एक समारोह में हुई थी। आर्थिक तंगी के कारण उसने अपनी बेटी को डेढ़ लाख रुपये में बेचने का सौदा किया था।
पुलिस के अनुसार, महिला को सौदे की रकम में केवल 80 हजार रुपये मिले थे, जबकि बाकी राशि बाद में देने का वादा किया गया था। तय समय पर पूरी रकम नहीं मिलने और मामला उजागर होने की आशंका के चलते उसने बेटी के अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी।
कई गंभीर धाराएं बढ़ाई गईं
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64, 65(1), 87, 143 और 3(5) के साथ पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 तथा 16/17 भी मुकदमे में जोड़ दी हैं।
पुलिस ने मनीष (जानसठ, मुजफ्फरनगर), लवी कुमार (फलावदा, मेरठ), पिंकी मलिक (नई मंडी, मुजफ्फरनगर) तथा पीड़िता की मां को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मानव तस्करी के नेटवर्क की भी जांच
राजपुर थाना प्रभारी पीड़ी भट्ट ने बताया कि पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी नाबालिगों की खरीद-फरोख्त या मानव तस्करी जैसे मामलों में शामिल रहे हैं या नहीं। साथ ही इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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