Almora News: फर्जी यूटीईटी प्रमाणपत्र से नौकरी पाने वाले तीन शिक्षक बर्खास्त, मुकदमा दर्ज
फर्जी यूटीईटी प्रमाणपत्र से नौकरी पाने का मामला, तीन शिक्षक बर्खास्त और मुकदमा दर्ज
विभागीय सत्यापन में प्रमाणपत्रों के अनुक्रमांक और क्यूआर कोड फर्जी मिले, शिक्षा विभाग की तहरीर पर पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी।
अल्मोड़ा, 1 नवंबर 2026। उत्तराखंड में सरकारी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। अल्मोड़ा जिले के भैंसियाछाना ब्लॉक के तीन प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त सहायक अध्यापकों के यूटीईटी-1 (2024) प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। विभागीय सत्यापन में प्रमाणपत्रों पर दर्ज अनुक्रमांक से लेकर क्यूआर कोड तक कूटरचित मिले। मामले में शिक्षा विभाग की तहरीर पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विभाग इससे पहले ही तीनों को सेवा से निष्कासित कर चुका है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला नवंबर 2025 में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (प्रारंभिक शिक्षा) की ओर से निकाली गई सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 जनवरी 2026 को तीन अभ्यर्थियों को भैंसियाछाना ब्लॉक के अलग-अलग राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति दी गई थी। इनमें भूपेंद्र कुमार निवासी खड़की, पिथौरागढ़ को राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुनखेत नवीन, अंजना ग्वासीकोटी निवासी तल्ला पानी, पिथौरागढ़ को राजकीय प्राथमिक विद्यालय बोड़ा और प्रियांशु चंद्र निवासी दमुवाढूंगा को राजकीय प्राथमिक विद्यालय बूढ़ाधौर में तैनाती मिली थी।
जानकारी के अनुसार, यह मामला नवंबर 2025 में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय (प्रारंभिक शिक्षा) की ओर से निकाली गई सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद 27 जनवरी 2026 को तीन अभ्यर्थियों को भैंसियाछाना ब्लॉक के अलग-अलग राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्ति दी गई थी। इनमें भूपेंद्र कुमार निवासी खड़की, पिथौरागढ़ को राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुनखेत नवीन, अंजना ग्वासीकोटी निवासी तल्ला पानी, पिथौरागढ़ को राजकीय प्राथमिक विद्यालय बोड़ा और प्रियांशु चंद्र निवासी दमुवाढूंगा को राजकीय प्राथमिक विद्यालय बूढ़ाधौर में तैनाती मिली थी।
नियुक्ति के बाद शिक्षा विभाग ने तीनों शिक्षकों के शैक्षणिक अभिलेखों और पात्रता प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया। इस दौरान यूटीईटी प्रथम 2024 के प्रमाणपत्रों में दर्ज अनुक्रमांकों को लेकर संदेह हुआ। विभाग ने प्रमाणपत्रों की आधिकारिक पुष्टि के लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से सत्यापन कराया तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। परिषद की मूल सारणीयन पंजिका और मुख्य रिकॉर्ड में तीनों अभ्यर्थियों के न तो अनुक्रमांक मिले और न ही उनके नाम दर्ज पाए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि नौकरी पाने के लिए प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों पर अंकित क्यूआर कोड वास्तविक नहीं थे। क्यूआर कोड के साथ छेड़छाड़ कर प्रमाणपत्रों को एडिट किए जाने की पुष्टि हुई। विभागीय जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद तीनों शिक्षकों को सेवा से निष्कासित कर दिया गया।
शिक्षा विभाग की तहरीर पर मुकदमा दर्ज
मामले में कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना से संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। कोतवाल योगेश चंद्र उपाध्याय ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, सीओ बलवंत सिंह रावत ने बताया कि शिक्षा विभाग की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की गई है। पुलिस पूरे प्रकरण की गहन विवेचना कर रही है। जांच के दौरान साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में प्रस्तुत किए जाने वाले शैक्षणिक और पात्रता प्रमाणपत्रों के सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उनके आधार पर नौकरी हासिल करने के इस मामले में अन्य कोई व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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