Ramnagar News: बुलडोजर एक्शन में कई पक्के मकान ध्वस्त, वन भूमि से हटाया अतिक्रमण
पूछड़ी बस्ती में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए चला बुलडोजर।
भारी पुलिस बल और पीएसी की तीन कंपनियों की मौजूदगी में चला अभियान, हाईकोर्ट में विचाराधीन मामलों वाले निर्माणों को फिलहाल कार्रवाई से रखा गया अलग।
रामनगर (नैनीताल)। नैनीताल जिले के रामनगर में कोसी नदी किनारे स्थित पुछड़ी बस्ती में शनिवार सुबह वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र में सुबह करीब पांच से छह बजे के बीच शुरू हुई कार्रवाई में बुलडोजर और जेसीबी की मदद से चिह्नित मकानों को ध्वस्त किया गया। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अभियान के तहत करीब 82 मकानों पर कार्रवाई की गई। वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा।
पुछड़ी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दूसरे चरण की इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन ने पहले से ही व्यापक तैयारियां की थीं। शुक्रवार को अधिकारियों की मौजूदगी में पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की टीमों को अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद शनिवार तड़के टीमें मशीनों और भारी सुरक्षा बल के साथ मौके पर पहुंचीं। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही क्षेत्र में आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई थी और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर आसपास के रास्तों पर बैरियर लगाए गए थे।
कार्रवाई से पहले ही मकान खाली करने लगे थे परिवार
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से पहले जिला प्रशासन की ओर से संबंधित लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस और मुनादी के माध्यम से जानकारी दी गई थी। शुक्रवार शाम को अभियान की तैयारियों को अंतिम रूप देने के बाद देर रात से ही कई परिवारों ने अपने मकान स्वयं खाली करने और निर्माण सामग्री निकालने शुरू कर दी थी। लोग घरों से ईंटें, दरवाजे और अन्य उपयोगी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखाई दिए।
शनिवार सुबह जब बुलडोजर और जेसीबी ने चिह्नित निर्माणों को हटाना शुरू किया तो बस्ती में अफरा-तफरी का माहौल रहा। मकानों को टूटता देखकर कुछ महिलाएं भावुक होकर रोती नजर आईं। प्रभावित परिवारों ने ठंड के मौसम में बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर रहने की व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच निर्धारित अभियान जारी रखा।
दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टर में बांटा गया क्षेत्र
बड़े स्तर पर चलाए गए अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन, सात जोन और 14 सेक्टर में विभाजित किया था। इसके अलावा छह बैरियर बनाए गए थे। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के अनुसार, अभियान के लिए पांच सेक्टर मजिस्ट्रेट, पांच अपर पुलिस अधीक्षक, छह क्षेत्राधिकारी, 25 निरीक्षक और 82 उपनिरीक्षकों की तैनाती की गई थी। पीएसी की तीन कंपनियों के साथ अग्निशमन विभाग की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान की निगरानी की। सुरक्षा व्यवस्था के तहत आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही नियंत्रित रखी गई, ताकि ध्वस्तीकरण के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण हटाने के बाद कब्जामुक्त कराई गई सरकारी भूमि वन विभाग को सौंपी जाएगी।
ताहिर मुल्ला पर वन भूमि बेचकर बस्ती बसाने का आरोप
पुछड़ी क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण के मामले में ताहिर मुल्ला नाम के व्यक्ति की भूमिका को लेकर भी प्रशासन की ओर से आरोप सामने आए हैं। प्रशासन के अनुसार, आरोप है कि उसने वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा कर बाहर से आए लोगों को भूखंड बेचे और इस तरह वहां बस्ती बसाई। वन विभाग की ओर से इस संबंध में उसके खिलाफ विभागीय और पुलिस स्तर पर मामले दर्ज कराए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। इन आरोपों पर संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना बाकी है।
2025 में पहले चरण में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
रामनगर के पुछड़ी क्षेत्र में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान इससे पहले भी चलाया जा चुका है। सात दिसंबर 2025 को अभियान के पहले चरण में प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 51 से अधिक निर्माण हटाए थे। उस समय भी बड़ी संख्या में पुलिस और वनकर्मियों की तैनाती की गई थी।
अब दूसरे चरण में शेष चिह्नित अतिक्रमणों को हटाने के लिए अभियान चलाया गया। कार्रवाई से पहले वन विभाग ने कुल 92 निर्माणों को चिह्नित किए जाने की जानकारी दी थी। इनमें से नौ निर्माणों से संबंधित मामले न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण उन्हें फिलहाल कार्रवाई से अलग रखा गया था। शेष निर्माणों पर कार्रवाई की तैयारी की गई थी। शनिवार को 82 मकानों पर बुलडोजर चलने की जानकारी सामने आई।
सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने पर प्रशासन का जोर
पुछड़ी बस्ती में दूसरे चरण की कार्रवाई के बाद प्रशासन और वन विभाग का जोर कब्जामुक्त कराई गई सरकारी भूमि को दोबारा अतिक्रमण से बचाने पर रहेगा। अभियान के दौरान सामने आए आरोपों के मद्देनजर कथित अवैध जमीन खरीद-फरोख्त की जांच और इसमें शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करना भी महत्वपूर्ण होगा।
रामनगर में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई को चर्चा में ला दिया है। अब इस अभियान के बाद वन विभाग की ओर से मुक्त कराई गई भूमि की सुरक्षा और भविष्य में अतिक्रमण रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
— Uttarakhand Morning Post

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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