सीधे-साधे लोगों के बौद्धिक शोषण से पाप के भागी न बनें: सत्य साधक
कलयुग में भवसागर से तरने का एकमात्र उपाय है प्रभु का नाम: सत्य साधक गुरुजी
लखनऊ। जय मां पीतांबरी साधना एवं दिव्य योग ट्रस्ट के संस्थापक सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरु जी ने कहा इस घोर कलिकाल में भवसागर पार करने के लिए भगवान का नाम ही एकमात्र साधन है। गुरु जी ने कहा मोक्ष की परम पद प्राप्ति के लिए भगवान या देवी के किसी भी रूप को हृदय में बसाकर बस उसी नाम का सिमरन शुरू कर दीजिए फिर सन्मार्ग में चलते हुए जीवन में कुछ और करने की आवश्यकता नहीं है। गुरु जी ने कहा सभी देवी देवता ईश्वर एक समान है बस उनके रूप अलग-अलग हैं। इसलिए किसी भी स्वरूप में हम ईश्वर के नाम का जप कर मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। गुरुजी श्रावस्ती जनपद अंतर्गत राप्ती नदी के तट पर मां बगलामुखी हवन यज्ञ के उपरांत भक्तजनों को संबोधित कर रहे थे।
इस दौरान गुरुजी ने वर्तमान समय में विद्या के दुरुपयोग द्वारा अनाधिकृत धनोपार्जन करने वालों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह लोग स्वयं तो पतन की ओर जा रहे हैं वहीं, सीधे-साधे लोगों को भी पाप के भागी बना रहे हैं। गुरु जी ने रामचरित मानस के दोहे “बेचहिं बेदु धरमु दुहि लेहीं। पिसुन पराय पाप कहि देहीं॥
कपटी कुटिल कलहप्रिय क्रोधी। बेद बिदूषक बिस्व बिरोधी।
के अर्थ को बताते हुए कहा कि कलयुग में लोग अपनी विद्या का दुरुपयोग करके उससे सिर्फ अनधिकृत धनोपार्जन का साधन बना लेंगे तथा दूसरों की चुगली आदि करके पार्पजन करके न सिर्फ अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा का क्षरण करेंगे अपितु सीधे सादे लोगों का बौद्धिक शोषण करके पाप के भागी बनेंगे जिससे धार्मिक लोगों के प्रति लोग संदेह की दृष्टि से देखेंगे जिससे कुल मिलाकर सबका नुकसान होगा । ऐसे में हमें बचने के लिए सिर्फ और सिर्फ नाम जप पर ही पूर्ण बल देना चाहिए।
गुरु जी ने रामचरित मानस के दोहे कलयुग केवल नाम अधारा,सुमिर सुमिर नर उतरा ही पारा, के अर्थ को बताते हुए कहा कि गोस्वामीजी ने कहा है कि कलयुग में केवल भगवान के नाम से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।
यहां सघन आधार था वहीं कलयुग में मात्र राम नाम की महिमा जपने से ही अपने जीवन के उद्देश्य को साकार किया जा सकता है। जो सच्चे मन से प्रभु का नाम जप लेता है। उसके जीवन की नैया हर मझधार से निकल शांतिपूर्वक आगे बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि नाम की महिमा हर युग में महान रही है चाहे नाम प्रह्लाद ने लिया हो चाहे शबरी ने या द्राेपदी सुदामा ने या तुलसी जैसे कितने ही भक्तों ने नाम को सहारा लेकर अपनी नैया को पार लगाया है।
उन्होंने कहा कि कलयुग में नाम की महिमा अपार है इसके जाप मात्र से ही मनुष्य अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।जो मनुष्य भौतिक सुख सुविधाओं में लीन होकर ईश्वर को भूल जाता है, उसे अंत में पछताना पड़ता है।
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