हल्द्वानी: अष्टादशभुजा महालक्ष्मी मंदिर में बसंतिक नवरात्रि पर भागवत कथा की रसधार
व्यास पंडित खजान पंत ने समझाया – वसुदेव के मन में ही भगवान का प्रवेश संभव
सोमेश्वर यति जी महाराज ने श्रद्धालुओं को सन्मार्ग में चलने का संदेश और आशीर्वाद दिया
हल्द्वानी। अष्टादशभुजा महालक्ष्मी मंदिर, बेरीपड़ाव हल्द्वानी में बसंतिक नवरात्रि के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में व्यास पंडित खजान पंत ने बताया कि भागवत के अनुसार परम जिज्ञासु राजा परीक्षित को त्यागी, विरागी एवं महामुनि शुकदेव के मार्गदर्शन से भगवान के विश्वात्मस्वरूप की दिव्य झांकी प्राप्त हुई।
पंडित खजान पंत ने कहा कि वसुदेव के निर्मल, शांत और समाधिस्थ मन में ही भगवान का आवेश और प्रवेश होता है। उन्होंने समझाया कि जीव का बार-बार संसार में जन्म लेना और भवबंध में बंधना, भगवान के दिव्य जन्म और कर्म के रहस्य को न समझने का परिणाम है।
कथा में यह भी बताया गया कि समस्त मंगलों के परम मंगल, सन्मय, चिन्मय और आनंदमय प्रभु कृष्ण वसुदेव अपने अंतःस्थल में विराजमान होने के कारण ही देवकी ने उन्हें अपने गर्भ में धारण किया। जैसे योग के अष्टांग होते हैं, वैसे ही भगवान अपने माता-पिता के अष्टम आविर्भाव हैं। योग का अंतिम सोपान समाधि है और उसी प्रकार भगवान का अवतरण और जीवन का तिरोभाव अचिंत्य योग शक्ति से पूर्ण एवं समाधि स्वरूप है।
इस अवसर पर मंदिर के व्यवस्थापक सोमेश्वर यति जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को सन्मार्ग पर चलने का संदेश देते हुए सुख और समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर उमेश कुमार अग्रवाल, विरेन्द्र कुमार अग्रवाल , बिमलेश अग्रवाल , देव तिवारी, उमेश वार्ष्णेय सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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