हल्द्वानी: पति की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई पत्नी, बेटे की आंखों के सामने बिखर गया परिवार
एक साल में उजड़ गया पूरा परिवार, बेटे की चीखों ने झकझोरा मोहल्ला
हल्द्वानी। मुखानी क्षेत्र के जज फार्म से एक बेहद भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। एक मां, जो पिछले एक साल से अपने जीवन के सबसे बड़े दर्द को सह रही थी, आखिरकार उस बोझ के आगे टूट गई। गुरुवार सुबह जब उसका बेटा नींद से उठा, तो कुछ ही पलों में उसकी दुनिया उजड़ गई—उसकी चीखों से पूरा मोहल्ला गूंज उठा।
बताया जा रहा है कि 44 वर्षीय विमला सती अपने बेटे के साथ किराए के मकान में रहती थीं। मकान मालिक पिछले कुछ समय से बाहर थे और घर की देखरेख की जिम्मेदारी विमला को ही सौंपी गई थी। गुरुवार सुबह जब बेटा जागा तो मां कमरे में नहीं मिली। पहले तो उसने सोचा कि वह कहीं आसपास होंगी, लेकिन तलाश करते-करते जैसे ही वह दूसरे कमरे में पहुंचा, सामने का दृश्य देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। मां छत के पंखे पर लटकी हुई थी। बेटे की दर्दनाक चीखें सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विमला सती पिछले लंबे समय से मानसिक तनाव से गुजर रही थीं। करीब एक साल पहले उनके पति कौशल कुमार, जो पेशे से प्रॉपर्टी डीलर थे, ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। पति की अचानक हुई मौत का गहरा सदमा विमला सह नहीं पाईं।
परिजनों के अनुसार, वह अक्सर चुप-चुप रहती थीं, नींद नहीं आती थी और दवाइयों का सहारा लेना पड़ रहा था। बेटे और परिवार के सामने वह खुद को संभालने की कोशिश जरूर करती थीं, लेकिन भीतर ही भीतर टूटती जा रही थीं।
बुधवार की रात भी सब कुछ सामान्य था। उन्होंने अपने 15 वर्षीय बेटे और सास के साथ खाना खाया, देर रात तक बेटे के साथ टहलती रहीं। उस समय किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह साथ बिताए गए आखिरी पल हैं।
सुबह होते ही यह दर्दनाक सच्चाई सामने आई और एक साल के भीतर ही परिवार पूरी तरह बिखर गया। बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं परिजनों और आसपास के लोगों की आंखें भी नम हैं।
भावुक सुसाइड नोट
“मैं अपनी मौत की जिम्मेदार खुद हूं। अगर जिंदा रहूंगी तो पागल हो जाऊंगी… इससे अच्छा तो मरना ही सही है…”
इन शब्दों में एक ऐसी टूटन और दर्द छिपा है, जिसे शायद वह किसी से कह नहीं पाईं। यह नोट उनके अंदर चल रहे गहरे संघर्ष और अकेलेपन की कहानी बयां करता है।
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