बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने हेतु वनाधिकार कानून ही एकमात्र रास्ता- Nainital News
लालकुआं (नैनीताल)। वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता एवं पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता द्वारा वनाधिकार कानून पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वितीय चरण में बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाए जाने से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2006 राज्य सरकार को भेजे गए उस पत्र पर चर्चा की गई, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है। उक्त पत्र में यह भी उल्लेख है कि राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में जाकर आदेश में संशोधन का अनुरोध कर सकती थी।
दुर्भाग्यवश, तब से अब तक किसी भी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका प्रस्तुत नहीं की गई, जिसके परिणामस्वरूप बिंदुखत्ता सहित 63 गोठ खत्तों की फाइलें आज तक केंद्र स्तर पर लंबित हैं और राजस्व ग्राम का मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
इस चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पूर्व की प्रक्रिया के माध्यम से राजस्व ग्राम बनाए जाने का मार्ग अब व्यवहारिक रूप से अवरुद्ध हो चुका है।
ऐसी स्थिति में वनाधिकार कानून, 2006 ही एकमात्र वैधानिक और प्रभावी मार्ग है, जिसके अंतर्गत राजस्व ग्राम बनाए जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। इस कानून के तहत ग्राम सभा एवं जिला स्तरीय समिति को निर्णय का अधिकार प्रदान किया गया है तथा सुप्रीम कोर्ट में जाने की बाध्यता समाप्त हो जाती है।
वनाधिकार समिति एवं पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता का यह संयुक्त मत है कि राजस्व ग्राम के प्रश्न का समाधान अब केवल वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ही संभव है। यदि कोई पक्ष या विपक्ष वनाधिकार कानून के अतिरिक्त किसी अन्य कानून के माध्यम से राजस्व ग्राम बनाए जाने की बात करता है, तो वह केवल भ्रम एवं अफवाह फैलाने का कार्य कर रहा है।
वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता द्वारा समस्त अभिलेख प्रस्तुत करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि चाहे पक्ष हो या विपक्ष, अफवाह फैलाने वालों को दिनांक 8 फरवरी को खुले मंच पर आमंत्रित किया जाता है। समिति ने चुनौती दी कि यदि वनाधिकार कानून के अतिरिक्त कोई अन्य वैधानिक रास्ता मौजूद है, तो यह बताया जाए कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद राजस्व ग्राम किस प्रकार बनाया जा सकता है।
बैठक में वनाधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ, सचिव भुवन भट्ट, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह, चंचल कोरंगा, इंदर पनेरी, दलवीर कफोला, श्याम सिंह, रंजीत गड़िया, कविराज धामी, उमेश भट्ट, बसंत पांडे, भरत नेगी, रमेश गोस्वामी, कैलाश जोशी, भुवन शर्मा, नंदन बोरा, गोविन्द बोरा, बलवंत बिष्ट, तारा दत्त जोशी, रमेश कार्की, के.डी. मिश्रा, कुन्दन सिंह, हरेंद्र बिष्ट सहित दो दर्जन से अधिक लोग उपस्थित रहे।
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