उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को 25 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी पद्मभूषण से सम्मानित
भगत सिंह कोश्यारी (फाइल फोटो), जिन्हें 25 मई को पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा।
शिक्षा, समाजसेवा और राजनीति में उल्लेखनीय योगदान के लिए नई दिल्ली में मिलेगा प्रतिष्ठित सम्मान
नई दिल्ली/उत्तराखंड, 24 मई 2026। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को 25 मई को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। श्री कोश्यारी को यह प्रतिष्ठित सम्मान सामाजिक कार्य, शिक्षा, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में उनके दीर्घकालिक योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है। उन्हें एक राष्ट्रवादी नेता, शिक्षाविद् और समाजसेवी के रूप में पहचाना जाता है, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जनसेवा और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया है।
17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के सुदूर गांव पलानधुरा में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने कठिन ग्रामीण परिस्थितियों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने 1964 में आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और 1964-65 में राजा का रामपुर (एटा, उत्तर प्रदेश) में व्याख्याता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाते हुए 1965 के बाद पूर्ण रूप से शैक्षणिक और सामाजिक कार्यों को समर्पित कर दिया।
श्री कोश्यारी ने सरस्वती शिशु मंदिर, कासगंज में अध्यापन कार्य किया और वर्ष 1966 में पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना कर सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार की नींव रखी। उन्होंने विवेकानंद इंटर कॉलेज, पिथौरागढ़ की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही वे सरस्वती विहार, नैनीताल से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। उन्होंने लंबे समय तक आरएसएस में विभाग कार्यवाह के रूप में कार्य किया और उत्तरांचल उत्थान परिषद के सचिव के रूप में राज्य में शिक्षा के विकास में योगदान दिया। वर्ष 1979 से 1990 तक वे कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य रहे और शिक्षा नीति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सामाजिक जागरूकता के लिए पिथौरागढ़ से हिंदी साप्ताहिक ‘पर्वत पीयूष’ का भी प्रकाशन शुरू किया। आपातकाल के दौरान मीसा के तहत उनकी गिरफ्तारी भी उनके सक्रिय सार्वजनिक जीवन का हिस्सा रही।
राजनीतिक जीवन में भी श्री कोश्यारी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 1997 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने और उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2000 में राज्य के पहले मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया और बाद में विधानसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका निभाई। वर्ष 2008 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए और 2014 में नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने। उन्होंने ऊर्जा मंत्री के रूप में टिहरी जल विद्युत परियोजना सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने राज्यसभा और लोकसभा दोनों में याचिका समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए रेल कनेक्टिविटी, वन रैंक वन पेंशन और बुनियादी ढांचे जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत कीं। वर्ष 2019 में उन्हें महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया और बाद में गोवा के राज्यपाल (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में भी उन्होंने कार्य किया।
शिक्षा, राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ भगत सिंह कोश्यारी एक लेखक भी हैं। उन्होंने ‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों’ और ‘उत्तरांचल प्रदेश: संघर्ष एवं समाधान’ जैसी पुस्तकें लिखीं, जो उत्तराखंड के विकास के प्रति उनकी सोच और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। अपने सादगीपूर्ण जीवन, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण के कारण वे आज भी ‘भगत दा’ के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित किए जाते हैं।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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