बिंदुखत्ता मामले में भ्रामक खबरों से सावधान रहने की अपील – Nainital News
संयुक्त बैठक में हाईकोर्ट फैसले को लेकर फैलाई जा रही गलत जानकारी पर जताई चिंता, FRA के तहत अधिकारों को बताया वैधानिक रास्ता
लालकुआं, 21 मार्च 2026: वन अधिकार समिति बिंदुखत्ता एवं पूर्व सैनिक संगठन की संयुक्त बैठक में 20 मार्च 2026 के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्णय को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया माध्यमों में फैल रही भ्रामक खबरों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि न्यायालय के आदेश को “बड़ा झटका” बताना तथ्यों का अधूरा एवं भ्रामक प्रस्तुतीकरण है। बताया गया कि याचिका को इसलिए निस्तारित किया गया क्योंकि यह केंद्र सरकार के 4 दिसंबर 2006 के आदेश के विपरीत थी, जिसमें नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चंपावत जनपदों में वन भूमि को राजस्व गांव में परिवर्तित करने के प्रस्ताव पर रोक लगाई गई थी।
संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त याचिका वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के प्रावधानों पर आधारित नहीं थी, इसलिए न्यायालय ने इस अधिनियम के अंतर्गत मिलने वाले व्यक्तिगत एवं सामुदायिक अधिकारों पर कोई टिप्पणी नहीं की।
बैठक में सर्वसम्मति से यह मत व्यक्त किया गया कि बिंदुखत्ता क्षेत्र के निवासियों के लिए वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 6 के अंतर्गत अधिकारों का दावा सबसे प्रभावी एवं वैधानिक मार्ग है। यह दावा पहले ही किया जा चुका है और जिला स्तरीय समिति (DLC) द्वारा स्वीकृत भी किया जा चुका है, जिसके आधार पर राजस्व गांव का दर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
बैठक में भुवन चंद्र पोखरिया के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से पारित किया गया। संगठनों का कहना है कि उनका क्षेत्र से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और पूर्व में मना करने के बावजूद उन्होंने याचिका दायर कर क्षेत्र में भ्रम की स्थिति उत्पन्न की।
अंत में संगठनों ने मीडिया से अपील की कि तथ्यों का संतुलित एवं जिम्मेदार प्रस्तुतीकरण किया जाए, ताकि क्षेत्र में अनावश्यक भ्रम और निराशा का वातावरण न बने।
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