Operation Sindoor: पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारत की एयर स्ट्राइक, 9 ठिकाने तबाह, 100 से अधिक आतंकी ढेर
Operation Sindoor , Air Strike Pakistan: भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एयरस्ट्राइक की है। एक साथ 9 ठिकानों पर हमला किया गया है। सरकार ने बुधवार को एक बयान में कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ ठिकानों पर हमला किया गया। बयान में कहा गया है कि किसी भी पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया गया।
आखिरकार भारत ने पाकिस्तान के आतंकी संगठनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर ही दी। इंडियन एयरफोर्स ने मंगलवार आधी रात 1:05 बजे पाकिस्तान और पीओके, यानी पाक अधिकृत कश्मीर के भीतर एयर स्ट्राइक की।
इस हमले में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। इनमें लश्कर-ए-तैयबा के हाई वैल्यू टारगेट (HVT) हाफिज अब्दुल मलिक भी शामिल हैं। मलिक मुरिदके स्थित मरकज तैयबा एयर स्ट्राइक में मारा गया।
भारत की ये जवाबी कार्रवाई पहलगाम हमले के 15 दिन बाद की गई है और इसका नाम दिया है ‘ऑपरेशन सिंदूर’। ये नाम उन महिलाओं को समर्पित है, जिनके पतियों की पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकियों ने हत्या कर दी थी।
न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पीएम मोदी ऑपरेशन सिंदूर को पूरी रात मॉनिटर करते रहे।
सरकार ने एयर स्ट्राइक के 9:30 घंटे बाद जानकारी दी
सेना ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें विदेश विक्रम मिसरी और आर्मी की कर्नल सोफिया कुरैशी और एयरफोर्स से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ऑपरेशन के बारे में जानकारी दी। सबसे पहले एयर स्ट्राइक का 2 मिनट का वीडियो प्ले किया गया। इसमें आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना की कार्रवाई दिखाई गई।
कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि रात 1:05 बजे और 1:30 बजे के बीच ऑपरेशन हुआ। पाकिस्तान और पीओके में 9 टारगेट पहचाने गए थे। इन्हें हमने तबाह कर दिया। लॉन्चपैड, ट्रेनिंग सेंटर्स टारगेट किए गए।
पीओके में मुजफ्फराबाद स्थित लश्कर के सवाई नाला ट्रेनिंग सेंटर को सबसे पहले निशान बनाया गया। सोनमर्ग, गुलमर्ग और पहलगाम हमले के आतंकियों ने यहीं ट्रेनिंग ली।
मुजफ्फराबाद का सैयदना बिलाल कैंप। यहां हथियार, विस्फोटक और जंगल सर्वाइवल की ट्रेनिंग दी जाती थी।
कोटली का लश्कर का गुरपुर कैंप। पूंछ में 2023 में श्रद्धालुओं पर हमला करने वाले आतंकी यहीं ट्रेंड हुए थे।
भिम्बर का बरनाला कैंप। यहां हथियार चलाना सिखाया जाता है।
कोटली का अब्बास कैंप। यह एलओसी से 13 किमी दूर है। फिदायीन तैयार होते हैं।
सियालकोट का सरजल कैंप। मार्च 2025 में पुलिस जवानों की हत्या के आतंकवादियों को यहीं ट्रेन किया गया था।
सियालकोट का हिजबुल महमूना जाया कैंप। पठानकोट हमला यहीं प्लान किया गया।
मुरीदके का मरकद तैयबा कैंप है। अजमल कसाब और डेविड कोलमैन हेडली यहीं ट्रेन हुए थे।।
मरकज सुभानअल्लाह भावलपुर जैश का हेडक्वार्टर था। रिक्रूटमेंट, ट्रेनिंग दी जाती थी। बड़े अफसर यहां आते थे।
विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा, ‘पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था। 9 आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया और सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया।
ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के शिकार लोगों को न्याय दिलाने के लिए लॉन्च किया गया। इस कार्रवाई में 9 आतंकी ठिकानों को टारगेट किया गया और उन्हें बर्बाद किया गया।
भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी
कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका ने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के तहत आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। ये खास ध्यान दिया गया कि निर्दोष नागरिकों को नुकसान नहीं पहुंचे, इसलिए एजेंसियों के इनपुट पर खास ध्यान दिया गया। सवाईनाला कैंप पहला टारगेट है। ये लश्कर तैय्यबा का गढ़ था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया।
विक्रम मिसरी ने कहा, पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ ने ली है। हमलावरों की पहचान भी हुई है। हमारी इंटेलिजेंस ने हमले में शामिल लोगों से जुड़ी जानकारी जुटा ली है। इस हमले का कनेक्शन पाकिस्तान से है। पाकिस्तान दुनियाभर में आतंकवादियों के लिए एक शरण स्थल के रूप में पहचान बना चुका है। 22 अप्रैल को पहलगाम में बर्बरतापूर्वक हमला किया। इसमें वहां मौजूद लोगों को करीब से और परिवारों के सामने सिर पर गोली मारी गई। परिवार के सदस्यों को जानबूझकर आघात कराया गया। जम्मू कश्मीरी में पर्यटन बढ़ रहा था। पिछले साल सवा 2 करोड़ से ज्यादा टूरिस्ट कश्मीर आए थे। इस संघ राज्य क्षेत्र में विकास और प्रगति को नुकसान पहुंचाकर पिछड़ा रखने का उद्देश्य था। ये जम्मू-कश्मीर सहित भारत में सामुदायिक घटना कराने की कोशिश की।
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