गुप्त नवरात्रि: समय माता मंदिर में मां बगलामुखी की विशेष साधना, सत्य साधक विजेंद्र पांडे का लोककल्याण अनुष्ठान
समय माता मंदिर में मां बगलामुखी की विशेष साधना करते सत्य साधक विजेंद्र पांडे।
15 से 23 जुलाई तक लोककल्याण और विश्व शांति की कामना के साथ विशेष अनुष्ठान, पूर्णाहुति पर होगा हवन-यज्ञ व विशाल भंडारा।
श्रावस्ती। गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर श्रावस्ती जिले के प्रसिद्ध समय माता मंदिर में सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी लोककल्याण, विश्व शांति और मानव कल्याण की भावना से मां बगलामुखी की विशेष रात्रिकालीन साधना कर रहे हैं। 15 जुलाई से प्रारंभ हुई यह साधना गुप्त नवरात्रि के समापन तक निरंतर चलेगी। साधना की पूर्णाहुति पर मंदिर परिसर में विधि-विधान से हवन-यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
श्रावस्ती जिला मुख्यालय से लगभग 13 किलोमीटर दूर जमुनहा विकासखंड के पतझियां गांव के समीप स्थित समय माता मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है। घने जंगल के बीच स्थित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपति दूर-दूर से माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए यहां पहुंचते हैं।
गुप्त नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे गुरुजी ने बताया कि सनातन परंपरा में इन नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की गुप्त साधना का विशेष महत्व माना गया है। उन्होंने कहा कि दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी को अष्टम महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। उन्हें पीताम्बरा तथा ब्रह्मास्त्र स्वरूप भी कहा जाता है। मां बगलामुखी की उपासना विशेष रूप से शत्रु बाधा, न्यायालय संबंधी मामलों में सफलता, विरोधियों पर विजय तथा नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
विजेंद्र पांडे ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सौराष्ट्र में आए भीषण तूफान को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने मां बगलामुखी की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां बगलामुखी का प्राकट्य हुआ और उन्होंने सृष्टि की रक्षा की। इसी कारण मां बगलामुखी को स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। उनकी आराधना में पीले रंग का विशेष महत्व बताया गया है तथा पूजा के दौरान पीले वस्त्र, पीले पुष्प और हल्दी का विशेष प्रयोग किया जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को मां बगलामुखी के छत्तीस अक्षरों वाले प्रसिद्ध मंत्र के जाप का महत्व भी बताया। उन्होंने कहा कि जो साधक विधिवत मंत्र जाप करने में सक्षम न हों, वे श्रद्धा एवं विश्वास के साथ मां बगलामुखी चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के उपरांत अपने नाम, गोत्र एवं मनोकामना का संकल्प लेकर माता के समक्ष जल अर्पित करने की परंपरा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
सत्य साधक श्री विजेंद्र पांडे ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व समय माता मंदिर में एक अद्भुत घटना घटी थी। उनके अनुसार मंदिर के कपाट अचानक स्वतः बंद हो गए थे, जिससे वहां मौजूद श्रद्धालु आश्चर्यचकित रह गए। बाद में धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इसे मंदिर की शुद्धता भंग होने से जोड़कर देखा गया। इसके बाद सामूहिक रूप से माता की आराधना एवं प्रार्थना की गई, जिसके पश्चात मंदिर के कपाट पुनः खुल गए। उन्होंने कहा कि समय माता मंदिर में शुद्धता एवं धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है और यहां आने वाले अनेक श्रद्धालु आध्यात्मिक एवं अलौकिक अनुभूति का अनुभव करने की बात बताते हैं।
गुप्त नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन कर विशेष साधना में सहभागी बन रहे हैं। इस अनुष्ठान में ज्योतिषाचार्य अंबुज तिवारी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव, सुरेंद्रनाथ द्विवेदी, कृष्णा भाटी सहित अनेक श्रद्धालु सक्रिय सहभागिता निभा रहे हैं। साधना अवधि में सुबह से देर शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन बना हुआ है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर है।
मंदिर परिसर में गुप्त नवरात्रि की पूर्णाहुति पर विशेष हवन-यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

मोहन चंद्र जोशी, नैनीताल (उत्तराखंड) के मान्यता प्राप्त वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तराखंड मॉर्निंग पोस्ट के संपादक हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष व जनहितकारी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं।
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