देहरादून: “मां तो मां होती है…” बेटे के लिए आंसुओं को ताकत बनाकर इंसाफ तक पहुंची मां
डेढ़ साल तक नहीं मानी हार… आंसुओं को हिम्मत बनाकर मां ने सच तक बनाई अपनी राह
देहरादून: कहते हैं मां का दर्जा भगवान से भी ऊंचा होता है… क्योंकि जहां हर रास्ता बंद हो जाता है, वहां मां की ममता अपने बच्चे के लिए नई राह बना देती है। देहरादून की एक मां ने इस बात को सच साबित कर दिखाया। अपने 18 साल के बेटे को खोने के बाद भी वो टूटी नहीं, बल्कि उसकी याद को अपनी ताकत बनाकर इंसाफ की राह पर चल पड़ी।
फरवरी 2024 की एक दर्दनाक रात ने इस परिवार की पूरी दुनिया बदल दी। 18 वर्षीय क्षितिज चौधरी अपने दोस्त के साथ घर लौट रहा था। अगले ही दिन उसे अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाना था, लेकिन एक तेज रफ्तार डंपर ने उसके सपनों को ही कुचल दिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया और फिर एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां 17 फरवरी को उसने जिंदगी की जंग हार दी। एक मां के लिए यह पल किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं था।
बेटे के अंतिम संस्कार के बाद जहां एक तरफ घर में सन्नाटा था, वहीं दूसरी ओर एक मां के दिल में अपने बेटे के लिए न्याय की आग जल रही थी। ललिता चौधरी ने अपने आंसुओं को कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने ठान लिया कि बेटे के साथ जो हुआ, उसका सच सामने लाना ही होगा।
इस संघर्ष के दौरान उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई। शुरुआत में उन्हें निराशा भी हाथ लगी और एक मौके पर यह तक कहा गया कि “हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है”। समय बीतता गया, लेकिन इस जवाब ने उन्हें तोड़ने के बजाय और मजबूत कर दिया। उन्होंने हार मानने के बजाय खुद सच्चाई तक पहुंचने का फैसला किया।
इसके बाद मां खुद सड़कों पर उतर आईं। प्रेमनगर से लेकर ढकरानी तक उन्होंने 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज जुटाए। घंटों तक बैठकर हर वीडियो को खंगाला, हर गुजरते वाहन में अपने बेटे के लिए जवाब तलाशती रहीं। उनकी इस अथक मेहनत और हौसले ने आखिरकार उन्हें उस डंपर और उसके मालिक तक पहुंचा दिया, जिसने उनके बेटे की जिंदगी छीन ली थी।
डेढ़ साल के लंबे संघर्ष के बाद जब मां सारे सबूत लेकर अधिकारियों के पास पहुंचीं, तो मामले को फिर से जांच के लिए आगे बढ़ाया गया। अब एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है और मां को भरोसा है कि उनके बेटे को न्याय जरूर मिलेगा।
ललिता चौधरी की आंखों में आज भी बेटे की यादें हैं, लेकिन अब उन आंसुओं में उम्मीद भी झलकती है। उनका कहना है, “मैंने अपने बेटे के लिए जो कर सकती थी, वो किया… अब मुझे विश्वास है कि उसे इंसाफ जरूर मिलेगा।”
यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं है, बल्कि एक मां की उस अटूट ममता और हौसले की है, जो हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देती है। सच ही कहा गया है—
मां कभी हारती नहीं… क्योंकि उसकी दुआ में भगवान से भी ज्यादा शक्ति होती है।
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