चंपावत: अपने गांव में रोजगार — गौतम की कहानी बनी रिवर्स पलायन का मॉडल
Champawat News- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य में रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही योजनाएँ आज धरातल पर सार्थक परिणाम दे रही हैं। इन्हीं प्रयासों का प्रत्यक्ष उदाहरण है चम्पावत जनपद का युवा गौतम खर्कवाल, जिसने पहाड़ में रहकर ही कमाई का मजबूत रास्ता चुना और सफल उद्यमी बनकर दिखाया।
पहाड़ के अधिकांश युवाओं की तरह खर्क निवासी 24 वर्षीय गौतम खर्कवाल ने भी इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन के बाद रोजगार की तलाश में बड़े शहर का रुख किया। आमतौर पर होता यह है कि पहाड़ का युवा या तो सरकारी नौकरी की लंबी तैयारी में जुट जाता है या फिर रोजगार की तलाश में बड़े महानगरों की ओर निकल पड़ता है। गौतम भी इसी परंपरागत राह पर चलते हुए नौकरी की खोज में दिल्ली पहुँचे।
लेकिन कुछ ही महीनों में उन्हें एहसास हुआ कि शहरों की भागदौड़, पारिवारिक दूरी और नौकरी का तनाव उनके मनचाहे जीवन से बहुत दूर है।
इसी बीच गौतम ने सोचा “क्यों न अपने गांव में ही कुछ ऐसा किया जाए जो आत्मनिर्भर बनाए, सम्मान दे और परिवार के साथ रहने का सुख भी दे?”
इसी सोच के साथ गौतम चम्पावत लौट आए। यहां आकर उन्होंने पशुपालन विभाग और डेयरी विकास विभाग से संपर्क किया और यह जानने की कोशिश की कि क्या गाय पालन एक स्थायी, सुरक्षित और लाभकारी स्वरोजगार बन सकता है। विभागीय टीम से मिले सकारात्मक मार्गदर्शन ने उनके भीतर नई ऊर्जा भर दी।
गौतम ने पशु चिकित्सालय नरसिंह डांडा की सहायता से मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के अंतर्गत 5 गायों हेतु आवेदन तैयार करवाया, जिसे आगे भारतीय स्टेट बैंक, खेतीखान भेजा गया। कुछ ही दिनों में बैंक से ऋण स्वीकृत हो गया और गौतम ने अच्छी नस्ल की गायों की खरीद कर अपना डेयरी व्यवसाय शुरू कर दिया।
आज गौतम प्रतिदिन 60 लीटर दूध चम्पावत की आंचल डेयरी को 40 रुपये प्रति लीटर की दर से सप्लाई कर रहे हैं। इसके साथ ही डेयरी विभाग से उन्हें सब्सिडी पर भूसा और हरा चारा मिलता है, जबकि पशुपालन विभाग की सहायता से गौतम ने अपने पशुओं का बीमा भी करा लिया है।
कुछ ही महीनों में गौतम ने न केवल अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया, बल्कि पहाड़ में रिवर्स पलायन का प्रेरक उदाहरण भी बन गए हैं। उनकी सफलता यह दिखाती है “रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन ही एकमात्र रास्ता नहीं; अपने गांव में भी सम्मानजनक, स्थायी और सफल जीवन बनाया जा सकता है।”
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